गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) ने 'सागर मंथन' लॉन्च किया है, जो भारत के डीप ओशन मिशन को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। यह स्वदेशी पोत गहरे समुद्र में खनिज खोज और वैज्ञानिक अनुसंधान में भारत की आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करेगा।
- GRSE द्वारा निर्मित 'सागर मंथन' एक अत्याधुनिक स्वदेशी महासागर अनुसंधान पोत (ORV) है।
- यह पोत 6 किमी की गहराई तक भूकंपीय सर्वेक्षण और खनिज खोज करने में सक्षम है।
- यह ₹4,077 करोड़ के 'डीप ओशन मिशन' का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) ने हाल ही में 'सागर मंथन' नामक एक स्वदेशी महासागर अनुसंधान पोत (ORV) का सफलतापूर्वक शुभारंभ किया है। यह पोत पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय ध्रुवीय और महासागर अनुसंधान केंद्र (NCPOR) के लिए तैयार किया गया है। इस पोत का प्रक्षेपण केवल पांच महीने के कील-लेयिंग (keel-laying) के बाद किया गया, जो भारत की तेजी से बढ़ती shipbuilding क्षमताओं को दर्शाता है।
तकनीकी विनिर्देश और क्षमताएं
'सागर मंथन' की लंबाई 89.5 मीटर और चौड़ाई 18.8 मीटर है, जिसका कुल वजन 5,900 टन है। यह पोत 14 नॉट्स की अधिकतम गति से चलने में सक्षम है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह तटीय क्षेत्रों और गहरे समुद्र में 6 किलोमीटर की गहराई तक swath multibeam और भूभौतिकीय भूकंपीय सर्वेक्षण करने में सक्षम है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, भारत लंबे समय से पुराने हो चुके अनुसंधान जहाजों पर निर्भर था, जिनमें आधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों को लगाने की क्षमता नहीं थी। कई महत्वपूर्ण खनिज खोजों के लिए भारतीय वैज्ञानिकों को अंतरराष्ट्रीय जहाजों को किराए पर लेना पड़ता था, जिससे न केवल लागत बढ़ती थी बल्कि डेटा की संप्रभुता पर भी असर पड़ता था। 'सागर मंथन' इस निर्भरता को समाप्त कर भारत को समुद्री अनुसंधान में आत्मनिर्भर बनाएगा।
"सागर मंथन का निर्माण भारत की इंजीनियरिंग शक्ति और वैज्ञानिक महत्वाकांक्षाओं के संगम का प्रतीक है, जो हमें नीली अर्थव्यवस्था (Blue Economy) में वैश्विक नेतृत्व की ओर ले जाएगा।"
बहुआयामी अनुसंधान कार्य
यह पोत केवल सर्वेक्षण तक सीमित नहीं है। यह चालकता, तापमान और गहराई (CTD) प्रोफाइलिंग के साथ-साथ जैविक नमूने एकत्र करने में सक्षम है। इसके अलावा, यह सतह और गहरे समुद्र में मूरिंग (mooring) और डेटा बॉय संचालन कर सकता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह स्वायत्त अंडरवाटर व्हीकल (AUVs) और रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल (ROVs) को लॉन्च और रिकवर करने में सक्षम है, जिन्हें राष्ट्रीय महासागर प्रौद्योगिकी संस्थान द्वारा विकसित किया जा रहा है।
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| लंबाई/चौड़ाई | 89.5m / 18.8m |
| अधिकतम गहराई क्षमता | 6 किलोमीटर |
| कुल वजन (Tonnage) | 5,900 टन |
| मिशन बजट | ₹4,077 करोड़ (डीप ओशन मिशन) |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: सागर मंथन पोत का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य गहरे समुद्र में खनिज अन्वेषण, जैविक नमूनाकरण और समुद्री पर्यावरण का अध्ययन करना है।
प्रश्न 2: यह किस मंत्रालय के अंतर्गत आता है?
उत्तर: यह पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (Ministry of Earth Sciences) के तत्वावधान में संचालित होगा।