बेंगलुरू के रैमण रिसर्च इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने क्वांटम अवस्थाओं की स्थिरता बढ़ाने का एक नया तरीका खोजा है। यह प्रगति क्वांटम कंप्यूटिंग को अधिक विश्वसनीय बना सकती है और जटिल समस्याओं के समाधान को तेज कर सकती है।

  • क्वांटम डेकोहेरेंस को कम करने के लिए समयबद्ध ऑपरेशन का प्रयोग
  • क्वांटम एंटैंगलमेंट और सुपरपोज़िशन की मूलभूत अवधारणाएँ
  • नयी तकनीक से क्वांटम कंप्यूटिंग की विश्वसनीयता में वृद्धि

क्वांटम कंप्यूटिंग का भविष्य अब एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है, जब बेंगलुरू स्थित रैमण रिसर्च इंस्टीट्यूट (RRI) के क्वांटम इन्फॉर्मेशन और कंप्यूटिंग (QuIC) लैब ने एक क्रांतिकारी प्रयोग का खुलासा किया। वैज्ञानिकों ने एक समयबद्ध ऑपरेशन के माध्यम से क्वांटम अवस्थाओं की स्थिरता को बढ़ाने का एक नया मार्ग दिखाया, जो डेकोहेरेंस—क्वांटम डेटा की नाजुकता—की चुनौतियों को मात देता है।

क्वांटम डेकोहेरेंस वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा बाहरी व्यवधान जैसे तापीय कंपन, चुंबकीय क्षेत्र या कॉस्मिक किरणें क्वांटम सुपरपोज़िशन और एंटैंगलमेंट को नष्ट कर देती हैं। वर्तमान में, अधिकांश क्वांटम बिट्स (क्यूबिट्स) केवल 10⁻⁵ से 10⁻⁴ सेकंड तक सहनशील रहते हैं, जबकि पारंपरिक मेमोरी मिलीसेकंड से वर्षों तक डेटा को सुरक्षित रख सकती है। यह असमानता क्वांटम कंप्यूटरों को व्यावहारिक अनुप्रयोगों के लिए सीमित करती है।

रैमण इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं ने एक सटीक समय पर लागू की गई पल्प को क्यूबिट्स पर लगाकर उनकी अवस्था को “सुपरपोज़िशन” में बनाए रखने में सफलता पाई। यह विधि क्यूबिट्स के बीच की एंटैंगलमेंट को लंबा कर देती है, जिससे गणनाएँ अधिक समय तक त्रुटि रहित चलती हैं। प्रयोग ने यह भी दिखाया कि यह तकनीक नैनोइलेक्ट्रॉनिक सर्किट्स और आयन ट्रैप्स दोनों में लागू की जा सकती है।

क्वांटम एंटैंगलमेंट और सुपरपोज़िशन क्या हैं?

क्वांटम एंटैंगलमेंट दो या अधिक कणों के बीच एक ऐसी कड़ी बनाता है कि उनके व्यक्तिगत अवस्थाएँ स्वतंत्र रूप से वर्णन योग्य नहीं होतीं। एक कण की माप से दूसरे की अवस्था का तुरंत पता चल जाता है, चाहे वे कितनी भी दूर हों। इस घटना को आइंस्टीन ने “दूरी पर भूतिया क्रिया” कहा।

सुपरपोज़िशन वह क्षमता है जिसके द्वारा एक क्वांटम कण एक ही समय में कई अवस्थाओं में मौजूद रह सकता है। हाइजेनबर्ग अनिश्चितता सिद्धांत के अनुसार, कुछ गुणों—जैसे स्थिति और संवेग—को एक साथ सटीक रूप से नहीं जाना जा सकता, जिससे यह अस्पष्टता उत्पन्न होती है।

क्यों यह महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि क्वांटम कंप्यूटिंग की विश्वसनीयता में यह प्रगति दवा खोज, पदार्थ विज्ञान, लॉजिस्टिक्स, वित्तीय मॉडलिंग, जलवायु पूर्वानुमान और सुरक्षित संचार जैसे क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है। यह नयी तकनीक न केवल तेज गणनाएँ संभव बनाती है, बल्कि जटिल समस्याओं के लिए पूरी तरह से नए समाधान भी प्रस्तुत करती है।

"समयबद्ध ऑपरेशन से डेकोहेरेंस को नियंत्रित करना क्वांटम कंप्यूटिंग के लिए एक गेम-चेंजर है," कहते हैं प्रोफेसर आर. शरमा, क्वांटम भौतिकी के प्रमुख।
Did You Know? 300 क्वांटम कणों के साथ भी संभावित अवस्थाओं की संख्या ब्रह्मांड के परमाणुओं से अधिक हो जाती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. क्वांटम डेकोहेरेंस क्या है और यह क्यों समस्या है?

क्वांटम डेकोहेरेंस वह घटना है जिसमें बाहरी व्यवधानों के कारण क्वांटम अवस्थाएँ अपनी विशेषताएँ खो देती हैं। यह समस्या क्वांटम गणनाओं को त्रुटिपूर्ण बना देती है क्योंकि क्यूबिट्स अपनी सुपरपोज़िशन या एंटैंगलमेंट को खो देते हैं।

2. नई तकनीक से क्वांटम कंप्यूटिंग की दक्षता कैसे बढ़ेगी?

समयबद्ध ऑपरेशन से क्यूबिट्स की अवस्था को लंबा बनाए रखने से, गणनाएँ अधिक समय तक त्रुटि रहित चलती हैं, जिससे जटिल एल्गोरिदम को चलाने के लिए आवश्यक समय घटता है और दक्षता बढ़ती है।