चेंनई मेट्रो की 118.9 किमी फेज II नेटवर्क के लिए आवश्यक 138 तीन‑कोच वाली ट्रेनों में से आखिरी ट्रेन अगले हफ्ते पूनामले‑वडापलानी डिपो में पहुँचेगी। यह ट्रेन परीक्षण के अंतिम चरणों में है, जबकि दूसरी और तीसरी बैचें अगले साल धीरे‑धीरे डिलीवर होंगी।

  • अंतिम ट्रेन अगले हफ्ते पूनामले डिपो में पहुंचेगी
  • पहले पैकेज की 15 ट्रेनों ने पहले ही सेवा शुरू कर दी है
  • दूसरी व तीसरी बैचों की डिलीवरी 2027 में शुरू होगी

परिचय

चेंनई मेट्रो रेल लिमिटेड (CMRL) ने पुष्टि की है कि फेज II के कॉरिडोर‑4 (पूनामले‑लाइटहाउस) के लिए आवश्यक अंतिम ट्रेन जल्द ही डिपो में पहुँचेगी। 118.9 किमी के इस विस्तार में कुल 138 तीन‑कोच वाली ट्रेनों की जरूरत है, जो तीन पैकेजों में ऑर्डर की गई थीं।

वर्तमान स्थिति

पहले पैकेज के 36 ट्रेनों में से 15 पहले ही पूनामले‑वडापलानी सेक्शन में संचालन के लिए तैयार हैं, जबकि शेष 21 ट्रेनों का विभिन्न परीक्षण चरणों में चल रहा है। CMRL के एक अधिकारी ने बताया कि अंतिम ट्रेन अगले कुछ दिनों में डिपो में पहुँचेगी।

भविष्य की योजना

इन ट्रेनों को केवल कॉरिडोर‑4 ही नहीं, बल्कि कोयंबेदु‑अलंदुर जैसी अन्य लाइनों में भी उपयोग किया जा सकता है। अधिकारी ने कहा कि अगले साल की शुरुआत में कोयंबेदु‑अलंदुर सेक्शन की सेवा शुरू होने पर इन ट्रेनों की आवृत्ति तय की जाएगी।

दूसरी व तीसरी बैच की प्रगति

दूसरी बैच (70 ट्रेनों) और तीसरी बैच (32 ट्रेनों) वर्तमान में उत्पादन के विभिन्न चरणों में हैं और 2027 के दौरान क्रमशः डिलीवर होंगी। प्रत्येक कोच की असेंबली के बाद बॉडी, सुरक्षा, एसी, ब्रेक और ट्रेन कंट्रोल सिस्टम की विस्तृत जांच की जाती है, जो तीन‑चार महीने तक चलती है।

Historical Background

चेंनई मेट्रो ने 2015 में फेज I के साथ संचालन शुरू किया, जिसमें 54 ट्रेनों की मदद से 54 किमी नेटवर्क कवरेज मिला। फेज II के तहत शहर के कई नए क्षेत्रों को जोड़ने के लिए कुल 118.9 किमी का विस्तार योजना बनाया गया, जिससे दैनिक यात्रियों की संख्या में 40 % तक वृद्धि की उम्मीद है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that completing the train fleet ahead of schedule not only accelerates urban mobility but also sets a benchmark for Indian metro projects, potentially attracting further private investment in mass transit infrastructure.

“Metro fleet readiness is a critical success factor for meeting projected ridership and ensuring operational safety,” says transport engineer Dr. Anil Mehta.
Did You Know?: Chennai Metro’s Phase I was the first Indian metro to use a completely driver‑less signaling system on a public line.

Frequently Asked Questions

Q1: क्या नई ट्रेनों को अन्य कॉरिडोर में इस्तेमाल किया जा सकता है?
हाँ, परीक्षण समाप्त होने पर इन्हें किसी भी कॉरिडोर में डिप्लॉय किया जा सकता है।

Q2: अगली बैचें कब तक पूरी होंगी?
दूसरी बैच 2027 के मध्य तक और तीसरी बैच 2028 के अंत तक पूरी होने की उम्मीद है।