इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अयोध्या में सुग्रीव किला मंदिर की जमीन लेने के बाद भुगतान न करने पर यूपी सरकार की कड़ी आलोचना की है। कोर्ट ने राज्य सरकार को बकाया राशि और ब्याज जमा करने का निर्देश दिया है।
- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार द्वारा सुग्रीव किला मंदिर की 1,512 वर्ग मीटर भूमि के भुगतान में देरी पर नाराजगी जताई।
- कोर्ट ने सरकार को ₹1.21 करोड़ की बकाया राशि 8% वार्षिक ब्याज के साथ जमा करने का आदेश दिया।
- अदालत ने सरकार के आचरण को 'सुनियोजित' और याचिकाकर्ता को 'बेवकूफ बनाने' वाला बताया।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर से जुड़े विकास कार्यों के लिए 'सुग्रीव किला' मंदिर की भूमि के अधिग्रहण में उत्तर प्रदेश सरकार की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अदालत ने पाया कि अधिकारियों ने 1,512 वर्ग मीटर के भूखंड का कब्जा तो ले लिया, लेकिन सहमत राशि का भुगतान नहीं किया।
न्यायमूर्ति अभधेश कुमार चौधरी और न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ की पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि अधिकारियों का आचरण निष्पक्ष या उचित नहीं था। याचिकाकर्ता, श्री ठाकुर राम जंकी सुग्रीवजी विराजमान मंदिर, ने आरोप लगाया था कि अधिकारियों ने उन्हें जमीन बेचने के लिए राजी किया और 15 दिनों के भीतर ₹1.38 करोड़ देने का वादा किया, लेकिन दिसंबर 2023 में कब्जा लेने के बाद ₹1.21 करोड़ का भुगतान नहीं किया।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल वित्तीय विवाद नहीं है, बल्कि सरकारी अधिग्रहण प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की कमी को दर्शाता है। जब राज्य सरकार एक तरफ बिक्री विलेख (sale deed) निष्पादित करती है और दूसरी तरफ उसे 'नजूल' या सरकारी भूमि बताकर भुगतान से बचती है, तो यह कानूनी विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है।
"जब राज्य सरकार स्वयं एक अनुबंध पक्षकार होती है, तो वह अपने प्रशासनिक विशेषाधिकारों का उपयोग करके निजी या धार्मिक संस्थाओं के कानूनी अधिकारों को दरकिनार नहीं कर सकती।"
कोर्ट ने इस बात पर आश्चर्य जताया कि आमतौर पर सरकारें जमीन खरीदने से पहले टाइटल सर्च करती हैं, लेकिन इस मामले में उन्होंने इसके विपरीत किया। अदालत ने टिप्पणी की कि पूरी कहानी किसी 'उर्वर दिमाग' (fertile mind) की उपज लगती है ताकि भुगतान में देरी की जा सके और तुरंत कब्जा प्राप्त किया जा सके।
राज्य सरकार ने बिक्री विलेख को रद्द कराने के लिए एक अलग दीवानी मुकदमा दायर किया है। हालांकि, हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि शीर्षक (title) विवादित था, तो संपत्ति याचिकाकर्ता को वापस मिलनी चाहिए थी, न कि अधिकारियों के पास रहनी चाहिए थी।
Frequently Asked Questions
1. हाईकोर्ट ने सरकार को क्या निर्देश दिया है?
कोर्ट ने सरकार को बकाया ₹1,20,96,000 और 8% ब्याज एक राष्ट्रीयकृत बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट के रूप में जमा करने का आदेश दिया है।
2. क्या कोर्ट ने जमीन के मालिकाना हक का फैसला कर दिया है?
नहीं, कोर्ट ने मालिकाना हक का फैसला नहीं किया है, बल्कि ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया है कि वह इस विवाद का निपटारा एक वर्ष के भीतर करे।