उत्तर प्रदेश सरकार झांसी में 11 सितंबर को एक महत्वपूर्ण डेयरी कॉन्क्लेव आयोजित करने जा रही है, जिसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की उद्यमिता और भागीदारी को बढ़ावा देना है। यह आयोजन बुंदेलखंड क्षेत्र में डेयरी विकास और सरकारी योजनाओं के लाभ पहुंचाने पर केंद्रित होगा।

  • 11 सितंबर 2026 को झांसी में तीन मंडलों (झांसी, चित्रकूट और कानपुर) के लिए डेयरी कॉन्क्लेव आयोजित होगा।
  • मुख्य विषय: डेयरी विकास में महिलाओं की भागीदारी और उद्यमिता।
  • उद्देश्य: सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लाभार्थियों तक पहुंचाना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना।
  • बुंदेलखंड क्षेत्र में महिलाओं के स्वामित्व वाली सहकारी समितियों का महत्वपूर्ण योगदान।

उत्तर प्रदेश सरकार ने घोषणा की है कि आगामी 11 सितंबर, 2026 को झांसी में एक विशाल डेयरी कॉन्क्लेव का आयोजन किया जाएगा। यह कॉन्क्लेव विशेष रूप से झांसी, चित्रकूट और कानपुर मंडलों के लिए आयोजित किया जा रहा है। इस आयोजन का केंद्रीय विषय 'डेयरी विकास में महिलाओं की भागीदारी और उद्यमिता' रखा गया है, जो राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था का नया चेहरा

डेयरी विकास विभाग की आयुक्त, धनलक्ष्मी के. (IAS) ने बताया कि यह कॉन्क्लेव बुंदेलखंड क्षेत्र की विशिष्टताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। बुंदेलखंड, जो कभी सूखे की समस्या से जूझता था, आज डेयरी के एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहा है। इस क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी इतनी अधिक है कि कई सहकारी समितियां और दूध उत्पादक कंपनियां पूरी तरह से महिलाओं के स्वामित्व में हैं।

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि उत्तर प्रदेश में डेयरी क्षेत्र में महिलाओं का योगदान 70% से अधिक है। महिलाएं न केवल पशुओं की देखभाल कर रही हैं, बल्कि वे अब आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक पशुधन प्रबंधन के माध्यम से उद्यमी के रूप में भी उभर रही हैं।

महिलाएं जन्मजात रूप से बेहतर प्रबंधक होती हैं; डेयरी उनके घरेलू कार्यों का अभिन्न हिस्सा रही है और अब वे ग्रामीण आजीविका की मुख्य शक्ति बन गई हैं।

सरकारी योजनाओं का प्रभाव और 'लखपति दीदी'

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में, राज्य सरकार कई महत्वपूर्ण योजनाएं चला रही है। 'नंद बाबा दुग्ध मिशन' के तहत, मुख्यमंत्री गोसंवर्धन योजना, मिनी नंदिनी और प्रगतिशील किसान योजना जैसी योजनाओं में कम से कम 50% लाभार्थियों का चयन महिलाओं के रूप में किया जाना अनिवार्य है। इसके अतिरिक्त, उत्तर प्रदेश डेयरी विकास एवं दुग्ध उत्पाद प्रोत्साहन नीति 2022 के तहत महिला उद्यमियों को डेयरी प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने के लिए प्राथमिकता के आधार पर सब्सिडी दी जा रही है।

सरकार का लक्ष्य इन महिलाओं को 'लखपति दीदी' से आगे बढ़ाकर 'करोड़पति दीदी' बनाना है, ताकि वे न केवल अपने परिवार की आय बढ़ा सकें बल्कि राष्ट्रीय जीडीपी में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकें।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

डेयरी विकास विभाग ने 17 अप्रैल 2026 को अपने 50 वर्ष पूरे किए। इस स्वर्ण जयंती के अवसर पर लखनऊ में 'दुग्धमृत स्वर्ण महोत्सव' का आयोजन किया गया था, जिसमें हजारों किसानों, विशेषज्ञों और निवेशकों ने भाग लिया था। झांसी का यह आगामी कॉन्क्लेव इसी श्रृंखला का एक क्षेत्रीय विस्तार है।

क्या आप जानते हैं?: उत्तर प्रदेश में वर्तमान में 9 ऐसी दूध उत्पादक कंपनियां (MPCs) हैं जो पूरी तरह से महिलाओं द्वारा संचालित और स्वामित्व में हैं।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: झांसी डेयरी कॉन्क्लेव का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका उद्देश्य डेयरी क्षेत्र में महिलाओं की उद्यमिता को बढ़ावा देना और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के लाभ पात्र लाभार्थियों तक पहुंचाना है।

प्रश्न 2: किन योजनाओं में महिलाओं को प्राथमिकता दी जा रही है?
उत्तर: मुख्यमंत्री गोसंवर्धन योजना, मिनी नंदिनी और प्रगतिशील किसान योजना जैसी प्रमुख योजनाओं में महिलाओं के लिए 50% कोटा आरक्षित है।