लखनऊ स्थित गिरी इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट स्टडीज (जीआईडीएस) में संकाय और शोधकर्ता पदों की कमी के कारण भविष्य को लेकर चिंता बढ़ रही है। यह संस्थान भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएसएसआर) और राज्य सरकार द्वारा वित्त पोषित है।
- जीआईडीएस में संकाय और शोधकर्ता पदों की कमी के कारण भविष्य को लेकर चिंता बढ़ रही है।
- 2016 से संस्थान में कोई स्थायी नियुक्ति नहीं हुई है।
- केवल 9 संकाय पदों में से 18 स्वीकृत पद भरे गए हैं, और केवल 1 शोध कर्मचारी पद भरा गया है।
लखनऊ स्थित गिरी इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट स्टडीज (जीआईडीएस) में संकाय और शोधकर्ता पदों की कमी के कारण भविष्य को लेकर चिंता बढ़ रही है। यह संस्थान भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएसएसआर) और राज्य सरकार द्वारा वित्त पोषित है।
समस्या की जड़ें
संसदीय स्थायी समिति की 371 रिपोर्ट में इस मुद्दे को उजागर किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि केवल 9 संकाय पदों में से 18 स्वीकृत पद भरे गए हैं, और केवल 1 शोध कर्मचारी पद भरा गया है। 2016 से संस्थान में कोई स्थायी नियुक्ति नहीं हुई है, और पदोन्नति की प्रक्रिया लगभग एक दशक से लंबित है।
क्यों यह महत्वपूर्ण है
जीआईडीएस एक महत्वपूर्ण संस्थान है जो उत्तर प्रदेश की नीति निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। स्वायत्त शैक्षणिक संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है जो सरकार के प्रदर्शन पर महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करते हैं।
"जीआईडीएस जैसे स्वायत्त संस्थानों को कमजोर करना एक व्यवस्थित परियोजना है जिसका उद्देश्य अनुसंधान-आधारित शैक्षणिक संस्थानों को खत्म करना है।" - विभूति नारायण राय
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- जीआईडीएस को कब स्थापित किया गया था?
- जीआईडीएस को किस प्रकार की मान्यता प्राप्त है?
| विवरण | वर्तमान स्थिति |
|---|---|
| संकाय पद | 9/18 |
| शोध कर्मचारी पद | 1/11 |