चमोली में बिजली परियोजना सुरंग में मलबे और पानी के घुसने से हुए हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर नौ हो गई है। एक श्रमिक अभी भी लापता है और बचाव अभियान जारी है।
- चमोली सुरंग हादसे में मरने वालों की संख्या अब 9 तक पहुंच गई है।
- एक श्रमिक अभी भी लापता है, जिसकी तलाश के लिए युद्ध स्तर पर अभियान जारी है।
- हादसा 13 अगस्त को भूस्खलन और पानी भरने के कारण हुआ था।
- SDRF, NDRF और ITBP जैसी एजेंसियां मिलकर रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं।
उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित विष्णुगढ़-पिपलीकोट जलविद्युत परियोजना के तहत निर्माणाधीन सुरंग में हुए भीषण हादसे ने एक बार फिर सुरक्षा मानकों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मंगलवार, 18 अगस्त 2026 को बचाव दल ने सुरंग के भीतर से एक और श्रमिक का शव बरामद किया, जिससे इस त्रासदी में मरने वालों की कुल संख्या बढ़कर नौ हो गई है।
यह दर्दनाक घटना 13 अगस्त को हुई थी, जब एक बड़े भूस्खलन के कारण तीन किलोमीटर लंबी सुरंग मलबे और पानी से भर गई थी। इस हादसे के दौरान सुरंग के भीतर मौजूद कुल 22 श्रमिक फंस गए थे। चमोली जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी एन.के. जोशी ने पुष्टि की कि बरामद शव को पहचान के लिए चमोली जिले के प्रशासनिक मुख्यालय, गोपेश्वर के जिला अस्पताल भेज दिया गया है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि हिमालयी क्षेत्रों में बड़े बुनियादी ढांचे के निर्माण के दौरान भूस्खलन का जोखिम अत्यधिक है। यह हादसा न केवल मानवीय क्षति को दर्शाता है, बल्कि आपदा प्रबंधन और सुरंग निर्माण की सुरक्षा प्रोटोकॉल की गंभीरता को भी रेखांकित करता है।
पहाड़ी क्षेत्रों में अनियंत्रित निर्माण और भूस्खलन की बढ़ती घटनाएं भविष्य में और भी बड़े संकटों का संकेत दे रही हैं।
वर्तमान में बचाव कार्य अत्यंत चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। सुरंग के भीतर भारी मात्रा में कीचड़ (sludge) और मलबा जमा है, जिससे राहत टीमों की पहुंच सीमित हो गई है। हालांकि, अधिकारियों ने बताया कि SDRF, NDRF, और ITBP की संयुक्त टीमें लगातार प्रयास कर रही हैं। मलबे को हटाने और पानी निकालने के लिए सक्शन पंपों और अन्य आधुनिक उपकरणों का उपयोग किया जा रहा है।
चमोली जिला सूचना अधिकारी धीरज कार्की के अनुसार, सुरंग के भीतर फंसे पांच जेसीबी मशीनों में से तीन को सफलतापूर्वक बाहर निकाल लिया गया है। इससे मलबे को हटाने और लापता श्रमिकों तक पहुंचने की प्रक्रिया में तेजी आई है। शेष दो मशीनों को भी जल्द ही निकालने की योजना है। इस हादसे में अब तक 12 अन्य श्रमिक घायल भी हुए हैं।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: यह हादसा कब और कैसे हुआ?
उत्तर: यह हादसा 13 अगस्त 2026 को हुआ जब एक भूस्खलन के कारण सुरंग में मलबा और पानी भर गया था।
प्रश्न 2: वर्तमान में बचाव अभियान का क्या स्टेटस है?
उत्तर: बचाव दल लापता श्रमिक की तलाश के लिए निरंतर काम कर रहे हैं और मलबे को हटाने के लिए मशीनों का उपयोग किया जा रहा है।