भारतीय टनल बचाव टीम नेपाल के रासुवा जिले के चिलिमे जलविद्युत परियोजना में जलप्रलय के बाद राहत कार्य में तेज़ी से प्रगति कर रही है। यह सहयोग नेपाल सेना के साथ मिलकर अभी भी लापता लोगों को ढूँढ़ने के लिए किया जा रहा है, जबकि अगस्त 26 के भयंकर बाढ़ में 1,344 लोग मारे गये और लगभग 4,900 लोग गायब हैं।

  • भारतीय टनल बचाव टीम ने चिलिमे जलविद्युत स्थल पर बचाव कार्य तेज किया
  • नेपाल सेना के साथ मिलकर लापता लोगों की खोज जारी
  • अगस्त 26 की बाढ़ में 1,344 मृत और 4,900 से अधिक लापता

26 अगस्त को नेपाल में आए विनाशकारी बाढ़ ने रासुवा जिले के चिलिमे जलविद्युत परियोजना को भी प्रभावित किया, जहाँ तेज़ प्रवाह, मलबा और जल स्तर में अचानक वृद्धि ने कई संरचनात्मक क्षति पहुंचाई। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस बाढ़ ने 1,344 लोगों की जान ले ली और 4,900 से अधिक लोगों को लापता कर दिया, जिससे राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्रणाली पर भारी दबाव पड़ा।

चिलिमे जलविद्युत साइट, जो 1,200 मेगावॉट क्षमता की है, पहाड़ी जलमार्गों के नीचे स्थित है और इस क्षेत्र की ऊर्जा जरूरतों का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। बाढ़ के कारण टनल, टर्बाइन और नियंत्रण कक्षों में गंभीर क्षति हुई, जिससे जल प्रवाह का नियंत्रण कठिन हो गया और बचाव कार्य जटिल बन गया।

भारत की टनल बचाव टीम, जो राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी (NDMA) के तहत प्रशिक्षित है, ने 2 सप्ताह पहले ही रासुवा में पहुंच कर अपनी विशेष रेस्क्यू डाइविंग, टनल अन्वेषण और मलबा हटाने की तकनीकें लागू कीं। टीम में 12 अनुभवी बचावकर्ता, हाई-टेक रेस्क्यू रोबोट और साइड-स्कैन सोनार शामिल हैं, जो जल के नीचे फंसे लोगों को खोजने में मदद कर रहे हैं।

नेपाल सेना के साथ मिलकर काम करने वाली इस टीम को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जैसे तेज़ प्रवाह, अस्थिर भूस्खलन और बाढ़ के बाद बचे हुए बर्फ़ीले जल की बारीक़ी। फिर भी, दोनों पक्षों ने एकजुट होकर 27 व्यक्ति को बचा लिया और 14 कब्जे वाले टनल सेक्शन को सुरक्षित किया, जिससे आगे के बचाव कार्य के लिए रास्ता खुला।

इतिहास में, नेपाल को बार-बार भूस्खलन‑प्रेरित बाढ़ से पीड़ित किया गया है। 2013, 2017 और 2021 के बाढ़‑प्रलयों में समान पैमाने की तबाही हुई थी, लेकिन इस बार की तीव्रता और जल स्तर की वृद्धि पहले की तुलना में अधिक थी, जिससे अंतरराष्ट्रीय सहायता की आवश्यकता बढ़ी।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि इस तरह के अंतर‑राष्ट्रीय बचाव सहयोग न केवल तत्काल मानवीय राहत प्रदान करते हैं, बल्कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक संबंधों को भी मजबूत बनाते हैं, विशेषकर जल संसाधन प्रबंधन और आपदा जोखिम कमी के क्षेत्रों में।

"चिलिमे जैसे जटिल टनल नेटवर्क में बचाव कार्य के लिए अंतर‑राष्ट्रीय विशेषज्ञता अनिवार्य है," बतलाते हैं प्रो. अंजली गुप्ता, आपदा प्रबंधन विशेषज्ञ।
Did You Know?: चिलिमे जलविद्युत परियोजना नेपाल की पहली हाई‑ड्रॉप टनल पावर प्लांट है, जिसकी निर्माण लागत 1.2 बिलियन डॉलर थी।

Frequently Asked Questions

Q1: भारतीय टीम ने अब तक कितनी बचाव कार्य पूरा किया?
A1: टीम ने अब तक 27 व्यक्तियों को बचाया है और कई टनल सेक्शन को सुरक्षित किया है, जबकि अभी भी कई लोग लापता हैं।

Q2: नेपाल सरकार ने आगे के राहत कार्य के लिए क्या कदम उठाए हैं?
A2: नेपाल सरकार ने अतिरिक्त अंतर‑राष्ट्रीय सहायता का अनुरोध किया है, अस्थायी शरणस्थलों की स्थापना की है और प्रभावित क्षेत्रों में मेडिकल इकाइयों को तैनात किया है।