भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने केरल में मानसून की तीव्रता बढ़ने के साथ भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। कन्नूर, कोझिकोड और वायनाड जैसे जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।
मुख्य बातें
- IMD ने केरल के कई जिलों के लिए भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।
- गुरुवार को कन्नूर, वायनाड और कोझिकोड के लिए ऑरेंज अलर्ट प्रभावी रहेगा।
- छत्तीसगढ़ और ओडिशा के ऊपर बने गहरे दबाव के कारण मानसून सक्रिय हुआ है।
- आगामी चार दिनों तक राज्य के विभिन्न हिस्सों में भारी बारिश की संभावना है।
केरल में दक्षिण-पश्चिम मानसून एक बार फिर से सक्रिय हो गया है, जिससे राज्य के कई हिस्सों में भारी बारिश की संभावना बढ़ गई है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने गुरुवार, 30 जुलाई 2026 को कन्नूर, वायनाड और कोझिकोड जिलों के लिए 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया है, जो अत्यधिक भारी वर्षा का संकेत देता है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, छत्तीसगढ़ के मध्य भाग और उससे सटे उत्तरी आंतरिक ओडिशा के ऊपर बने एक गहरे अवसाद (Deep Depression) के प्रभाव से मानसून की स्थिति मजबूत हुई है। इस मौसमी बदलाव के कारण पूरे राज्य में वर्षा की तीव्रता में वृद्धि देखी जा रही है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि मानसून का यह अचानक पुनरुद्धार तटीय और पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और अचानक बाढ़ (Flash Floods) का जोखिम बढ़ा सकता है। स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहने और आपदा प्रबंधन टीमों को तैनात करने की आवश्यकता है।
मानसून की सक्रियता और गहरे अवसाद के कारण अगले 72 घंटे केरल के लिए अत्यधिक संवेदनशील हैं।
मौसम विभाग ने शुक्रवार के लिए भी चेतावनी जारी की है, जिसमें कन्नूर, कासरगोड, कोट्टायम, पतनमतिट्टा और इडुक्की के लिए ऑरेंज अलर्ट का प्रावधान है। इसके विपरीत, तिरुवनंतपुरम, कोल्लम और अलाप्पुझा जैसे जिलों में केवल पीला अलर्ट जारी किया गया है, जहाँ छिटपुट भारी बारिश की उम्मीद है।
तुलनात्मक अलर्ट स्थिति
| अलर्ट का प्रकार | प्रभावित जिले (उदाहरण) | संभावित स्थिति |
|---|---|---|
| ऑरेंज अलर्ट | कन्नूर, वायनाड, कोझिकोड | अत्यधिक भारी वर्षा |
| येलो अलर्ट | तिरुवनंतपुरम, कोल्लम | मध्यम से भारी वर्षा |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. किन जिलों में सबसे ज्यादा खतरा है?
फिलहाल कन्नूर, वायनाड और कोझिकोड सबसे अधिक जोखिम वाले क्षेत्रों में हैं।
2. क्या बाढ़ की आशंका है?
हाँ, भारी बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव और पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन का खतरा बना हुआ है।