वायनाड में हालिया भारी बारिश के बावजूद, मानसून की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। जून और जुलाई के आंकड़ों के अनुसार, जिला सामान्य से 50% कम वर्षा दर्ज कर रहा है।

मुख्य बातें

  • वायनाड में मानसून की वर्षा सामान्य से 50% कम रही है।
  • जून-जुलाई के दौरान केवल 802 मिमी बारिश हुई, जबकि सामान्य 1,600 मिमी है।
  • लक्कडी में सर्वाधिक और मुथंगा में सबसे कम बारिश दर्ज की गई।
  • जलवायु परिवर्तन और अल नीनो को मानसून में देरी का मुख्य कारण माना जा रहा है।

केरल के वायनाड जिले में हाल के दिनों में हुई भारी बारिश के बावजूद, दक्षिण-पश्चिम मानसून की कुल वर्षा अभी भी सामान्य से लगभग 50% कम बनी हुई है। ह्यूम सेंटर फॉर इकोलॉजी एंड वाइल्डलाइफ बायोलॉजी द्वारा जारी आंकड़ों से पता चलता है कि मानसून के शुरुआती दो महीनों में जिले ने भारी सूखे जैसी स्थिति का सामना किया है।

ह्यूम वेदर लैब के आंकड़ों के अनुसार, 1 जून से 31 जुलाई के बीच वायनाड में औसत वर्षा केवल 802 मिमी दर्ज की गई, जबकि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार इस अवधि के लिए सामान्य वर्षा 1,600 मिमी होनी चाहिए थी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस वर्ष मानसून की देरी का मुख्य कारण वैश्विक जलवायु परिवर्तन और अल नीनो (El Niño) का संयुक्त प्रभाव है।

क्यों यह महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, वायनाड जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में वर्षा का असमान वितरण कृषि और जल संसाधनों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। यदि वर्षा का यह पैटर्न जारी रहता है, तो स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र और किसानों की आजीविका पर इसका गहरा प्रभाव पड़ेगा।

हालिया भारी बारिश ने कुछ राहत तो दी है, लेकिन कुल मौसमी कमी अभी भी बहुत अधिक है।

बारिश का वितरण पूरे जिले में अत्यधिक असमान रहा है। जहाँ लक्कडी ने 2,548 मिमी के साथ सर्वाधिक वर्षा दर्ज की, वहीं मुथंगा में केवल 228 मिमी बारिश हुई। स्थानीय निकायों की बात करें तो थोंडरनाड ग्राम पंचायत में सबसे अधिक और नुलपुझा ग्राम पंचायत में सबसे कम वर्षा देखी गई।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

वायनाड ऐतिहासिक रूप से अपनी समृद्ध जैव विविधता और मानसून पर निर्भर कृषि के लिए जाना जाता है। पिछले कुछ वर्षों में, जलवायु परिवर्तन के कारण मानसून के पैटर्न में अनिश्चितता बढ़ी है, जिससे अत्यधिक सूखे या अचानक बाढ़ जैसी स्थितियाँ पैदा हो रही हैं।

क्या आप जानते हैं?: वायनाड की कुछ क्षेत्रों में हालिया बारिश ने तापमान को अचानक गिरा दिया है, जिससे दिन का औसत तापमान 25°C तक पहुँच गया है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. वायनाड में मानसून की कमी का मुख्य कारण क्या है?
विशेषज्ञों के अनुसार, जलवायु परिवर्तन और अल नीनो का प्रभाव मानसून की देरी और कमी का मुख्य कारण है।

2. जिले में सबसे अधिक बारिश कहाँ हुई?
लक्कडी क्षेत्र में जिले में सबसे अधिक 2,548 मिमी वर्षा दर्ज की गई।