हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी में अनुकूल बदलावों के कारण अगले दो सप्ताह तक भारत में मानसून सक्रिय रहने की संभावना है। वैज्ञानिक एल नीनो के प्रभाव को कम करने के लिए हिंद महासागर द्विध्रुव (IOD) पर कड़ी नजर रख रहे हैं।
मुख्य बातें
- अगले 14 दिनों तक देश के कई हिस्सों में सक्रिय मानसून का अनुमान।
- हिंद महासागर में बदलाव के संकेत, जो एल नीनो के असर को कम कर सकते हैं।
- बंगाल की खाड़ी में बादलों के निर्माण के लिए अनुकूल वायुमंडलीय स्थितियां।
भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून अगले दो सप्ताह तक एक सक्रिय चरण में रहने वाला है। हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी के ऊपर मौसम प्रणालियों में हो रहे अनुकूल बदलावों के कारण व्यापक वर्षा की प्रबल संभावना है। मौसम वैज्ञानिक वर्तमान में 'न्यूट्रल IOD', 'एल नीनो' और 'MJO' जैसे महत्वपूर्ण कारकों की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं, जो 2026 के मानसून सीजन के भविष्य को निर्धारित करेंगे।
जलवायु वैज्ञानिकों के नवीनतम विश्लेषण के अनुसार, भारतीय महासागरीय द्विध्रुव (IOD) वर्तमान में तटस्थ (Neutral) चरण में है। इसका अर्थ है कि हिंद महासागर ने अभी तक उस तापमान पैटर्न को नहीं अपनाया है जो भारत के मानसून को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित कर सके। हालांकि, पूर्वी उष्णकटिबंधीय हिंद महासागर के ऊपर गरज के साथ तूफान की गतिविधियां काफी मजबूत बनी हुई हैं, जो वायुमंडल में उच्च सक्रियता का संकेत देती हैं।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, हिंद महासागर का आकार अपेक्षाकृत छोटा होने के कारण यहाँ स्थितियाँ बहुत तेजी से बदल सकती हैं। यदि आने वाले हफ्तों में एल नीनो और अधिक मजबूत होता है, तो यह एक 'पॉजिटिव IOD' को जन्म दे सकता है। पॉजिटिव IOD अक्सर एल नीनो के प्रतिकूल प्रभावों को कम करने में मदद करता है, जिससे भारत में वर्षा का संतुलन बना रहता है।
हिंद महासागर की बदलती गतिशीलता एल नीनो के नकारात्मक प्रभाव को बेअसर करने की क्षमता रखती है।
इसके अतिरिक्त, इंडोनेशिया और जावा के आसपास समुद्र की सतह के तापमान में गिरावट देखी जा रही है। यह प्रक्रिया 'अपवेलिंग' (Upwelling) से जुड़ी है, जहाँ गहरे समुद्र का ठंडा पानी सतह पर आता है। यह बदलाव पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के मौसम को प्रभावित कर सकता है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
मानसून का पैटर्न ऐतिहासिक रूप से एल नीनो और हिंद महासागर के बीच के संतुलन पर निर्भर करता है। पिछले दशकों में देखा गया है कि जब भी हिंद महासागर में सकारात्मक द्विध्रुव (Positive IOD) विकसित होता है, तो वह एल नीनो द्वारा उत्पन्न सूखे की स्थिति को काफी हद तक नियंत्रित कर लेता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. क्या एल नीनो से भारत में सूखा पड़ेगा?
एल नीनो आमतौर पर कम बारिश का कारण बनता है, लेकिन यदि हिंद महासागर में सकारात्मक IOD विकसित होता है, तो यह मानसून को बचा सकता है।
2. अगले दो सप्ताह मौसम कैसा रहेगा?
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, अगले 14 दिनों तक देश के अधिकांश हिस्सों में सक्रिय मानसून और भारी बारिश की संभावना है।