केरल में दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान वर्षा में 22% की भारी कमी दर्ज की गई है। मौसम विभाग ने सितंबर में भी कम बारिश का अनुमान जताया है, जिससे राज्य में समय से पहले गर्मियों जैसे हालात पैदा हो सकते हैं।
- केरल में मानसून की बारिश सामान्य से 22% कम रही है।
- वायनाड और इडुक्की जिलों में सबसे अधिक बारिश की कमी (क्रमशः 51% और 44%) देखी गई है।
- एल नीनो और कमजोर हिंद महासागर द्विध्रुव (IOD) मानसून की गतिविधि को बाधित कर रहे हैं।
- जल विद्युत जलाशयों के स्तर गिरने से बिजली और पानी की किल्लत का खतरा बढ़ गया है।
केरल वर्तमान में एक गंभीर मौसम संबंधी संकट का सामना कर रहा है। दक्षिण-पश्चिम मानसून के पहले तीन महीनों के बाद, राज्य अब एक 'कमी वाले सीजन' की ओर बढ़ रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, जून से अगस्त के अंत तक बारिश सामान्य से 22% कम रही है। सितंबर के लिए जारी मासिक आउटलुक ने भी सामान्य से कम वर्षा का अनुमान लगाया है, जिससे यह डर बढ़ गया है कि मानसून एक बड़े घाटे के साथ समाप्त होगा।
निजी मौसम पूर्वानुमान एजेंसी स्काईमेट (Skymet) ने पहले ही देश के लिए मानसून के पूर्वानुमान को घटाकर 'सूखा' कर दिया था, जिसमें मौसमी वर्षा को लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) के 85% पर अनुमानित किया गया था और सूखे की संभावना 70% बताई गई थी।
क्यों है यह स्थिति चिंताजनक?
BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यह केवल तापमान बढ़ने का मामला नहीं है, बल्कि यह राज्य की बुनियादी जरूरतों पर सीधा प्रहार है। केरल के 14 में से 8 जिलों में बारिश की भारी कमी है। विशेष रूप से वायनाड और इडुक्की जैसे जिलों में स्थिति भयावह है, जहाँ क्रमशः 51% और 44% की कमी दर्ज की गई है। चूंकि ये जिले केरल के प्रमुख बिजली उत्पादन जलाशयों का केंद्र हैं, इसलिए बारिश की यह कमी सीधे तौर पर जल और बिजली की उपलब्धता को प्रभावित करेगी।
"मौजूदा वायुमंडलीय स्थितियों को देखते हुए, सितंबर में बारिश की गतिविधि में किसी महत्वपूर्ण सुधार की गुंजाइश बहुत कम है, जिससे घाटा और बढ़ने की संभावना है।" - नीता के. गोपाल, निदेशक, IMD तिरुवनंतपुरम।
इस कमी का मुख्य कारण एल नीनो (El Niño) का मजबूत होना और हिंद महासागर द्विध्रुव (IOD) का कमजोर होना है। ये दोनों कारक आमतौर पर मानसून की तीव्रता को दबा देते हैं। इसके अलावा, पश्चिमी घाटों पर भारी बारिश लाने वाले प्रमुख कारक, जैसे कि अरब सागर से आने वाली तेज पश्चिमी हवाएं और बंगाल की खाड़ी में मौसम प्रणालियों का अभाव, इस साल अनुपस्थित रहे हैं।
| क्षेत्र/पैरामीटर | सामान्य वर्षा (mm) | वास्तविक वर्षा (mm) | कमी (%) |
|---|---|---|---|
| केरल (कुल) | 1,759 | 1,368 | 22% |
| वायनाड | - | - | 51% |
| इडुक्की | - | - | 44% |
ऐतिहासिक रूप से, केरल को तब भारी बारिश मिलती है जब बंगाल की खाड़ी और अरब सागर की प्रणालियां एक साथ सक्रिय होती हैं। लेकिन इस वर्ष, तट के साथ सक्रिय ऑफशोर ट्रफ की कमी ने मानसून के प्रभाव को सीमित कर दिया है। हालांकि, मानसून की वापसी के चरण के दौरान बंगाल की खाड़ी में विकसित होने वाले सिस्टम से दक्षिण केरल में छिटपुट भारी बारिश हो सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: क्या सितंबर में बारिश होने की कोई संभावना है?
उत्तर: IMD के अनुसार, कुछ हिस्सों में छिटपुट हल्की बारिश हो सकती है, लेकिन बड़े पैमाने पर बारिश की वापसी की संभावना बहुत कम है।
प्रश्न 2: एल नीनो का मानसून पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर: एल नीनो प्रशांत महासागर में पानी के गर्म होने की घटना है, जो अक्सर भारतीय मानसून को कमजोर करती है और सूखे की स्थिति पैदा करती है।