भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी शुरू होने वाली है, लेकिन उत्तर भारत के कई हिस्सों में अभी भी गरज-चमक के साथ बारिश का सिलसिला जारी रहेगा।
- मानसून की वापसी 19 सितंबर के आसपास उत्तर-पश्चिम भारत से शुरू होने की संभावना है।
- राजस्थान, दिल्ली, पंजाब और हरियाणा में अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश का अलर्ट है।
- इस साल देश के लगभग 43% हिस्सों में बारिश की भारी कमी देखी गई है।
- एल नीनो (El Niño) के प्रभाव के कारण मानसून सामान्य से नीचे रहा है।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण अपडेट जारी करते हुए कहा कि दक्षिण-पश्चिम मानसून उत्तर-पश्चिम भारत से लगभग 19 सितंबर के आसपास अपनी वापसी शुरू कर सकता है। सामान्यतः मानसून की वापसी 17 सितंबर के आसपास होती है, लेकिन इस साल मौसम के बदलते मिजाज के कारण इसमें थोड़ा बदलाव देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों से मानसून की वापसी के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ बन रही हैं। हालांकि, आधिकारिक विदाई से पहले, उत्तर भारत के बड़े हिस्से को अभी भी गरज-चमक, बिजली गिरने और तेज हवाओं के साथ बारिश का सामना करना पड़ सकता है। यह मौसम गतिविधि उत्तर गुजरात के ऊपर बन रहे कम दबाव के क्षेत्र (Low-pressure system) से जुड़ी हुई है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि मानसून की यह अनिश्चितता न केवल कृषि क्षेत्र के लिए बल्कि देश की खाद्य मुद्रास्फीति के लिए भी एक गंभीर चुनौती है। यदि मानसून का यह सत्र deficit (कमी) के साथ समाप्त होता है, तो इसका सीधा असर फसलों की पैदावार और बाजार में खाद्य कीमतों पर पड़ेगा।
मानसून की अनियमितता और एल नीनो का प्रभाव इस वर्ष कृषि चक्र के लिए एक बड़ी अनिश्चितता पैदा कर रहा है।
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस साल मानसून पूरे देश में सामान्य से कम रहा है। जून में बारिश सामान्य से 35.4% कम रही, जबकि अगस्त में 13.8% की कमी दर्ज की गई। सितंबर में भी अब तक 15% की कमी देखी जा चुकी है। वर्तमान में देश के लगभग 43 प्रतिशत हिस्से में बारिश की भारी कमी बनी हुई है।
क्षेत्रीय वर्षा स्थिति का तुलनात्मक विवरण
| राज्य/क्षेत्र | वर्षा का स्तर (कमी/अधिकता) |
|---|---|
| पंजाब | -40% (कमी) |
| बिहार | -35% (कमी) |
| राजस्थान | -25% (कमी) |
| मेघालय | -59% (कमी) |
| अंडमान और निकोबार | सामान्य के करीब |
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि की बात करें तो, मानसून की वापसी का समय हर साल बदलता रहता है, लेकिन इस वर्ष एल नीनो (El Niño) की स्थिति ने मौसम के पैटर्न को काफी प्रभावित किया है। एल नीनो अक्सर भारत में कम वर्षा का कारण बनता है, जिससे सूखे जैसी स्थिति पैदा होने का खतरा बढ़ जाता है।
Frequently Asked Questions
1. मानसून उत्तर-पश्चिम भारत से कब वापस जाएगा?
IMD के अनुसार, मानसून की वापसी 19 सितंबर के आसपास शुरू हो सकती है।
2. किन राज्यों में सबसे कम बारिश हुई है?
मेघालय (-59%) और पंजाब (-40%) जैसे राज्यों में वर्षा की भारी कमी दर्ज की गई है।