रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच कर्च जलडमरूमध्य और ब्लैक सी क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने वैश्विक खाद्य आपूर्ति को खतरे में डाल दिया है। समुद्री व्यापार में आई इस रुकावट से दुनिया भर में अनाज की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है।

मुख्य बातें

  • कर्च जलडमरूमध्य और ब्लैक सी में बढ़ते हमलों से समुद्री व्यापार ठप होने का खतरा।
  • रूस और यूक्रेन मिलकर दुनिया के गेहूं निर्यात का 25% से अधिक हिस्सा नियंत्रित करते हैं।
  • युद्ध के जोखिम और खराब मौसम का मेल एक 'परफेक्ट स्टॉर्म' पैदा कर सकता है।
  • भारत को खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रणनीतिक प्रबंधन की आवश्यकता है।

रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष ने एक बार फिर वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए गंभीर खतरे की घंटी बजा दी है। कर्च जलडमरूमध्य (Kerch Strait), ब्लैक सी और अज़ोव सागर के क्षेत्रों में बंदरगाहों, अनाज टर्मिनलों और मालवाहक जहाजों पर हो रहे हमलों ने समुद्री व्यापार को पंगु बना दिया है। शिपिंग कंपनियों द्वारा बढ़ते युद्ध-जोखिम बीमा प्रीमियम के कारण यात्राएं स्थगित कर दी गई हैं, जिससे 2022 जैसी वैश्विक खाद्य आपूर्ति संकट की पुनरावृत्ति का डर पैदा हो गया है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

मार्च 2022 में, रूस के यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने पर आक्रमण के बाद, FAO का खाद्य मूल्य सूचकांक अपने सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया था। उस समय अनाज की आपूर्ति बाधित होने से दुनिया भर में महंगाई बढ़ी थी। हालांकि कुछ समय के लिए स्थिति स्थिर हुई थी, लेकिन हालिया हमलों ने उस शांति को भंग कर दिया है, जिससे निर्यात मार्ग फिर से असुरक्षित हो गए हैं।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह संकट केवल एक क्षेत्रीय युद्ध नहीं है, बल्कि एक वैश्विक आर्थिक चुनौती है। ओडेसा बंदरगाह परिसर, जो यूक्रेन के कृषि निर्यात का 90% हिस्सा संभालता है, वर्तमान में परिचालन में बाधाओं का सामना कर रहा है। रूस और यूक्रेन का संयुक्त योगदान दुनिया के गेहूं निर्यात के एक चौथाई से अधिक, मक्का और जौ के 15% और सूरजमुखी तेल के 60% से अधिक हिस्से के लिए है।

समुद्री व्यापार मार्गों में अस्थिरता सीधे तौर पर वैश्विक खाद्य कीमतों और गरीब देशों की खाद्य सुरक्षा को प्रभावित करती है।

इस संकट के आयाम और भी जटिल हो जाते हैं जब हम इसे अन्य वैश्विक कारकों के साथ जोड़कर देखते हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव (ईरान-अमेरिका संघर्ष) और जलवायु परिवर्तन (एल नीनो और यूरोपीय हीटवेव) मिलकर एक 'परफेक्ट स्टॉर्म' की स्थिति पैदा कर सकते हैं। यदि सूरजमुखी तेल की कमी होती है, तो इसका असर सोयाबीन और पाम ऑयल की कीमतों पर भी पड़ेगा।

वस्तु (Commodity)रूस-यूक्रेन वैश्विक हिस्सेदारी
गेहूं (Wheat)>25%
मक्का और जौ (Corn & Barley)~15%
सूरजमुखी तेल (Sunflower Oil)>60%
क्या आप जानते हैं?: सूरजमुखी तेल की आपूर्ति में कमी आने पर वैश्विक बाजार में सोयाबीन और पाम ऑयल की कीमतें भी स्वचालित रूप से बढ़ जाती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. कर्च जलडमरूमध्य का महत्व क्या है?
यह एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है जो ब्लैक सी के व्यापार और रूस-यूक्रेन के कृषि निर्यात के लिए जीवन रेखा का काम करता है।

2. भारत पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा?
हालांकि भारत ने ईंधन और उर्वरक के मामले में खुद को सुरक्षित रखा है, लेकिन वैश्विक खाद्य कीमतों में उछाल भारतीय उपभोक्ताओं के लिए महंगाई का कारण बन सकता है।