संयुक्त राष्ट्र की UNIFIL शांति सेना का कार्यकाल समाप्त होने वाला है, जिससे दक्षिण लेबनान में सुरक्षा शून्य पैदा होने का खतरा है। राजनीतिक समाधान की कमी और इजरायल-लेबनान तनाव ने इस मिशन के भविष्य को अधर में लटका दिया है।

मुख्य बिंदु

  • UNIFIL का कार्यकाल इस साल के अंत तक समाप्त हो रहा है, जिससे क्षेत्र में सुरक्षा जोखिम बढ़ गया है।
  • इजरायल और अमेरिका के दबाव के कारण नए 'पायलट जोन' समझौतों से UNIFIL को बाहर रखा गया है।
  • भविष्य के मिशन में सैनिकों की संख्या 15,000 से घटकर मात्र 900-3,000 रह सकती है।
  • शांति सेना केवल निगरानी कर सकती है, लेकिन बिना राजनीतिक समझौते के स्थायी शांति असंभव है।

बेरूत, लेबनान - दक्षिण लेबनान में तैनात संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल (UNIFIL) के जनादेश की समय सीमा समाप्त होने के साथ ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंता बढ़ गई है। 2023 से जारी इजरायली युद्ध ने इस क्षेत्र को तबाह कर दिया है, और अब शांति सैनिकों की वापसी से एक बड़ा सुरक्षा अंतराल (Security Gap) पैदा होने की आशंका है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि UNIFIL के बाद कोई नया बल बनाया भी जाता है, तो वह काफी छोटा होगा और केवल एक क्षेत्रीय समझौते का हिस्सा होगा। राजनीतिक विश्लेषक इमाद सालामी के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बल केवल निगरानी कर सकते हैं, लेकिन वे घरेलू और क्षेत्रीय समझौतों का विकल्प नहीं हो सकते।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि UNIFIL को जानबूझकर हाशिए पर धकेला गया है। अमेरिका ने इजरायल के उस रुख का समर्थन किया है जिसमें निगरानी तंत्र को हटाने की मांग की गई थी, ताकि इजरायली सेना बिना किसी अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप के संचालित हो सके। यह रणनीतिक बदलाव लेबनान और इजरायल के बीच नाजुक संतुलन को बिगाड़ सकता है।

"बिना व्यापक राजनीतिक समाधान के, UNIFIL को UNTSO या किसी यूरोपीय बल से बदलने से जमीनी स्थिति में कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा।"

ऐतिहासिक रूप से, UNIFIL की स्थापना 1978 में लेबनानी गृहयुद्ध के दौरान हुई थी। इसे अक्सर प्रस्ताव 1701 को लागू करने में विफल रहने का आरोप लगाया गया, हालांकि इसका मूल उद्देश्य बलपूर्वक हथियार छीनना नहीं, बल्कि निगरानी और समन्वय करना था।

विशेषता UNIFIL (पिछला स्तर) प्रस्तावित नया मिशन (UNTSO/अन्य)
सैनिकों की संख्या ~15,000 (शिखर पर) 900 से 3,000
मुख्य भूमिका व्यापक निगरानी और समन्वय सीमित पर्यवेक्षण/पायलट जोन से बाहर
प्रभाव उच्च अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति सीमित क्षेत्रीय प्रभाव
क्या आप जानते हैं?: UNIFIL का जनादेश 1978 में शुरू हुआ था, लेकिन इसे लागू करने वाला प्रस्ताव 1701 लगभग दो दशक पहले अपनाया गया था, जो आज भी विवाद का केंद्र है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. UNIFIL के जाने से लेबनान पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
इससे सीमा पर सुरक्षा शून्य पैदा हो सकता है, जिससे इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच झड़पें बढ़ने का खतरा है।

2. क्या कोई अन्य बल UNIFIL की जगह लेगा?
UNTSO या यूरोपीय देशों के छोटे बलों के प्रस्ताव पर चर्चा हो रही है, लेकिन उनकी संख्या बहुत कम होगी।