पाकिस्तान एक बार फिर 'मक्का पैक्ट' के जरिए सुरक्षा कवच तलाश रहा है, लेकिन इतिहास गवाह है कि बगदाद पैक्ट (CENTO) के समय उसके तथाकथित सहयोगियों ने संकट के समय उसका साथ नहीं दिया था।

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मुख्य बिंदु

  • बगदाद पैक्ट (CENTO) को सोवियत संघ के खिलाफ बनाया गया था, जिसे पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ हथियार समझा।
  • 1965 और 1971 के युद्धों में पाकिस्तान को अपने सहयोगियों से कोई वास्तविक सैन्य मदद नहीं मिली।
  • 1971 में पाकिस्तान के दो टुकड़ों में बंटने के बावजूद उसके 'इस्लामिक दोस्तों' ने केवल आश्वासन दिए।
  • वर्तमान 'मक्का पैक्ट' उसी पुरानी रणनीति की याद दिलाता है जो पहले विफल रही थी।

इतिहास खुद को दोहराता है। हाल ही में पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की द्वारा हस्ताक्षरित मक्का पैक्ट ने एक पुरानी बहस को फिर से जीवित कर दिया है। पाकिस्तान का दावा है कि किसी भी सदस्य देश पर हमला सभी पर हमला माना जाएगा, लेकिन यह ठीक वैसा ही दावा था जैसा 1950 के दशक में बगदाद पैक्ट के समय किया गया था।

बगदाद पैक्ट: अमेरिका की बिसात और पाकिस्तान का भ्रम

1955 में इराक, तुर्की, ईरान, पाकिस्तान और ब्रिटेन ने मिलकर बगदाद पैक्ट बनाया था। इसका प्राथमिक उद्देश्य मध्य-पूर्व को सोवियत संघ के प्रभाव से बचाना था। अमेरिका ने इसे पूर्ण समर्थन दिया, जिसे बाद में CENTO (Central Treaty Organization) के नाम से जाना गया। पाकिस्तान ने इस गठबंधन का उपयोग अमेरिकी हथियार और प्रशिक्षण हासिल करने के लिए किया, यह सोचकर कि वह इस ताकत का इस्तेमाल भारत को दबाने के लिए करेगा।

Why This Matters

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि पाकिस्तान की सबसे बड़ी रणनीतिक भूल यह थी कि उसने 'साम्यवाद विरोधी' गठबंधन को 'भारत विरोधी' गठबंधन समझ लिया। अमेरिका पाकिस्तान को केवल एक चौकी (Outpost) के रूप में इस्तेमाल कर रहा था, न कि एक रणनीतिक साझेदार के रूप में जिसे वह भारत के खिलाफ युद्ध में झोंक दे।

"पाकिस्तान ने हमेशा सुरक्षा गारंटी के लिए बाहरी ताकतों पर भरोसा किया, लेकिन अंतरराष्ट्रीय राजनीति में केवल राष्ट्रीय हित सर्वोपरि होते हैं, धार्मिक या वैचारिक संबंध नहीं।"

जब युद्ध हुआ तो 'दोस्त' गायब थे

6 सितंबर 1965 को जब पाकिस्तान ने भारत पर हमला किया, तो उसे उम्मीद थी कि उसके CENTO सहयोगी मैदान में उतरेंगे। लेकिन हकीकत इसके उलट थी। अमेरिका ने दोनों देशों को हथियारों की आपूर्ति बंद कर दी, जबकि तुर्की और ईरान ने केवल नैतिक समर्थन दिया। 1971 की जंग और भी विनाशकारी रही। जब पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) अलग हो रहा था, तब भी पाकिस्तान के सहयोगियों ने कोई ठोस सैन्य हस्तक्षेप नहीं किया, जिससे पाकिस्तान दो टुकड़ों में बंट गया।

विशेषताबगदाद पैक्ट (CENTO)मक्का पैक्ट (नया)
मुख्य उद्देश्यसोवियत संघ को रोकनाक्षेत्रीय सुरक्षा/इस्लामिक एकता
प्रमुख सदस्यतुर्की, ईरान, पाकिस्तान, ब्रिटेनसऊदी अरब, तुर्की, पाकिस्तान
परिणाम1979 में भंगप्रारंभिक चरण (भविष्य संदिग्ध)
क्या आप जानते हैं?: बगदाद पैक्ट का नाम इसलिए पड़ा क्योंकि इसका मुख्यालय इराक की राजधानी बगदाद में था, लेकिन 1959 में इराक के बाहर निकलने के बाद इसका नाम बदलकर CENTO कर दिया गया था।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: CENTO को औपचारिक रूप से कब भंग किया गया?
उत्तर: ईरान की क्रांति के बाद, 16 मार्च 1979 को CENTO को आधिकारिक तौर पर समाप्त कर दिया गया।

प्रश्न 2: 1971 के युद्ध में अमेरिका की क्या भूमिका थी?
उत्तर: अमेरिका ने अपना सातवां बेड़ा भेजा था, लेकिन यह केवल दबाव बनाने के लिए था, भारत के खिलाफ किसी प्रत्यक्ष सैन्य कार्रवाई के लिए नहीं।