अमेरिका और सऊदी अरब के संयुक्त हवाई हमलों ने इराक के सात प्रांतों में ईरान समर्थित मिलिशिया के ठिकानों को निशाना बनाया है, जिसमें भारी तबाही हुई है। इस हमले में कम से कम 18 लड़ाके मारे गए हैं और दर्जनों अन्य घायल हुए हैं।
मुख्य बिंदु
- अमेरिका और सऊदी अरब के संयुक्त हवाई हमलों में 18 इराकी लड़ाके मारे गए।
- हमले इराक के 7 अलग-अलग प्रांतों में किए गए।
- ईरान समर्थित मिलिशिया द्वारा पिछले 72 घंटों में किए गए ड्रोन हमलों का यह जवाबी एक्शन है।
- तनाव बढ़ने के कारण जेद्दा में होने वाली महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक रद्द कर दी गई है।
मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका और सऊदी अरब के एक बड़े संयुक्त सैन्य अभियान ने इराक के भीतर ईरान समर्थित मिलिशिया के लॉजिस्टिक्स और हथियारों के ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचाया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, यह कार्रवाई पिछले 72 घंटों में ईरान की क्रांतिकारी गार्ड (IRGC) के कहने पर हुए 30 से अधिक ड्रोन हमलों के जवाब में की गई है।
युद्ध का बढ़ता दायरा और सैन्य कार्रवाई
इस भीषण हमले में इराक के सात प्रांतों को निशाना बनाया गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस सैन्य कार्रवाई में कम से कम 18 लड़ाके मारे गए और 32 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यद्यपि वे तनाव नहीं बढ़ाना चाहते, लेकिन वे अपनी संप्रभुता पर किसी भी हमले का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार हैं।
BozokMedia विश्लेषण: क्यों बढ़ रहा है खतरा?
BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि यह हमला केवल एक जवाबी कार्रवाई नहीं है, बल्कि क्षेत्र में ईरान के बढ़ते प्रभाव को रोकने की एक रणनीतिक कोशिश है। 'पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेज' (PMF), जो आधिकारिक तौर पर इराकी सेना का हिस्सा है, अब सीधे तौर पर अमेरिका और सऊदी अरब के लिए खतरा बन गई है।
ईरान समर्थित मिलिशिया द्वारा अमेरिकी ठिकानों पर लगातार हमले इस क्षेत्र में एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध की संभावना को जन्म दे रहे हैं।
इस हमले के बाद कूटनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है। इराक के प्रधानमंत्री और सऊदी क्राउन प्रिंस के बीच जेद्दा में होने वाली महत्वपूर्ण बैठक को सुरक्षा कारणों से रद्द कर दिया गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. यह हमला क्यों किया गया?
यह हमला ईरान समर्थित मिलिशिया द्वारा पिछले 72 घंटों में किए गए 30 से अधिक ड्रोन हमलों के जवाब में किया गया था।
2. हमले का प्रभाव क्या रहा?
इस हमले में 18 लड़ाके मारे गए और इराक के 7 प्रांतों में मिलिशिया के हथियारों के ठिकानों को नष्ट कर दिया गया।