ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकरण बढ़ने के बावजूद, भारत के विशाल गिग कार्यबल का एक बड़ा हिस्सा अभी भी सरकारी योजनाओं और सामाजिक सुरक्षा से वंचित है।

  • ई-श्रम पोर्टल पर केवल 8.58 लाख गिग वर्कर्स का पंजीकरण हुआ है, जो अनुमानित संख्या का बहुत कम हिस्सा है।
  • 5 में से 6 गिग वर्कर्स अभी भी सरकारी पहुंच से बाहर हैं।
  • पंजीकरण दर विभिन्न राज्यों में बहुत असमान है, जिससे नीतिगत अंतराल का पता चलता है।

भारत की 'नई युग सेवा अर्थव्यवस्था' का आधार माने जाने वाले गिग वर्कर्स के लिए सरकारी सुरक्षा कवच अभी भी अधूरा है। हालांकि 2025-26 के बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गिग वर्कर्स के लिए स्वास्थ्य कवरेज की घोषणा की थी, लेकिन जमीनी हकीकत सरकारी दावों से काफी अलग नजर आती है।

डेटा और वास्तविकता के बीच की खाई

सरकार का लक्ष्य एक करोड़ से अधिक गिग वर्कर्स को लाभान्वित करना है, लेकिन राज्यसभा में पेश किए गए हालिया आंकड़ों के अनुसार, ई-श्रम पोर्टल पर केवल 8.58 लाख गिग वर्कर्स का ही पंजीकरण हुआ है। यदि हम यह मान भी लें कि पंजीकरण की दर दोगुनी हो गई है, तब भी यह कुल अनुमानित कार्यबल का मात्र 15% ही होगा। इसका सीधा अर्थ यह है कि भारत के 85% गिग वर्कर्स अभी भी सामाजिक सुरक्षा के दायरे से बाहर हैं।

BozokMedia विश्लेषण: डेटा की कमी और नीतिगत चुनौतियां

BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि भारत में गिग कार्यबल के सटीक आकार को मापने के लिए कोई समर्पित तंत्र नहीं है। वर्तमान में सरकार मुख्य रूप से 2022 की नीति आयोग की रिपोर्ट पर निर्भर है, जिसने 2025-26 तक कार्यबल को 1.43 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान लगाया था। पीएलएफएस (PLFS) रिपोर्ट भी अभी तक गिग वर्कर्स को एक अलग श्रेणी के रूप में पूरी तरह से शामिल करने में विफल रही है।

गिग अर्थव्यवस्था का तेजी से विस्तार हो रहा है, लेकिन हमारे डेटा संग्रह के तरीके पुराने हैं, जो श्रमिकों को मुख्यधारा की नीतियों से दूर रख रहे हैं।

सामाजिक सुरक्षा कोड, 2020 ने दुर्घटना बीमा और मातृत्व लाभ जैसे वादे तो किए थे, लेकिन इनका कार्यान्वयन अभी भी कागजों तक सीमित है। इसके अलावा, पंजीकरण में क्षेत्रीय असमानता भी एक बड़ी समस्या है। उच्च शहरीकृत राज्य जैसे तमिलनाडु, तेलंगाना और केरल शीर्ष 10 राज्यों की सूची में भी नहीं हैं, जो दर्शाता है कि जागरूकता और पहुंच की भारी कमी है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत में गिग इकोनॉमी की शुरुआत पिछले दशक में ई-कॉमर्स और फूड डिलीवरी ऐप्स के उदय के साथ हुई। 2021 में e-Shram पोर्टल की शुरुआत असंगठित श्रमिकों के एक राष्ट्रीय डेटाबेस के रूप में की गई थी, ताकि उन्हें पहचान और लाभ दिए जा सकें।

Did You Know?: भारत की कुल कार्यबल का लगभग 2% हिस्सा गिग वर्कर्स का है, जो लगभग 61.6 करोड़ के कुल कार्यबल में से आता है।

Frequently Asked Questions

1. ई-श्रम पोर्टल क्या है?
यह असंगठित श्रमिकों का एक राष्ट्रीय डेटाबेस है जो उन्हें सामाजिक सुरक्षा लाभ प्राप्त करने में मदद करता है।

2. गिग वर्कर्स कौन हैं?
वे श्रमिक जो अल्पकालिक अनुबंधों या प्लेटफॉर्म-आधारित कार्यों (जैसे डिलीवरी या राइड-हेलिंग) के माध्यम से काम करते हैं।