केरल उच्च न्यायालय ने सबरीमाला मंदिर के लिए घी की खरीद में कथित भ्रष्टाचार और साजिश की जांच के लिए विजिलेंस और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (VACB) को विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का निर्देश दिया है।
मुख्य बातें
- केरल हाईकोर्ट ने मिल्मा से घी की खरीद में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए SIT गठित करने का आदेश दिया।
- जांच में तändler प्रक्रिया को दरकिनार कर ₹510 प्रति लीटर की दर से घी खरीदने के संदेह की जांच होगी।
- रिपोर्ट के अनुसार, यदि ई-टेंडर प्रक्रिया अपनाई जाती तो ₹2.27 करोड़ की बचत हो सकती थी।
- कोर्ट ने 3 सितंबर तक प्रगति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।
केरल उच्च न्यायालय ने सबरीमाला मंदिर में 'अरवना' तैयार करने के लिए मिल्मा (Milma) से घी की खरीद में हुई कथित साजिश की जांच करने के लिए विजिलेंस और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (VACB) को एक विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का निर्देश दिया है। यह मामला 2025-26 के तीर्थयात्रा सीजन के दौरान घी की आपूर्ति में हुई कथित अनियमितताओं से जुड़ा है।
मामले की पृष्ठभूमि
न्यायमूर्ति वी. राजा विजयराघवन और न्यायमूर्ति के.वी. जयकुमार की खंडपीठ ने त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (TDB) के अधिकारियों और मिल्मा के बीच संभावित मिलीभगत की जांच करने के लिए यह कदम उठाया है। मामले की शुरुआत एक सुओ मोटो कार्यवाही के रूप में हुई, जिसमें सबरीमाला विशेष आयुक्त और मुख्य सतर्कता अधिकारी की रिपोर्टों की समीक्षा की गई।
विजिलेंस रिपोर्ट में बड़े खुलासे
विजिलेंस अधिकारी की रिपोर्ट के अनुसार, तत्कालीन कार्यकारी अधिकारी मुरारी बाबू (जिनका जून 2026 में निधन हो गया) ने दावा किया था कि मिल्मा का घी उपयोग करने से कम मात्रा में घी की आवश्यकता होगी और गुणवत्ता बेहतर होगी। इस दावे के आधार पर, बोर्ड ने ई-टेंडर प्रक्रिया को छोड़कर मिल्मा से ₹510 प्रति लीटर की दर से 1,65,000 लीटर घी खरीदने की मंजूरी दे दी।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल वित्तीय अनियमितता का नहीं है, बल्कि धार्मिक संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही का भी है। यदि ई-टेंडर प्रक्रिया का पालन किया जाता, तो सरकारी खजाने के लगभग ₹2.27 करोड़ बचाए जा सकते थे। यह घटना सरकारी संस्थाओं और सहकारी निकायों के बीच होने वाले संभावित सांठगांठ पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
धार्मिक संस्थानों के फंड का दुरुपयोग न केवल वित्तीय अपराध है, बल्कि भक्तों के विश्वास के साथ भी खिलवाड़ है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. कोर्ट ने विजिलेंस को क्या निर्देश दिया है?
कोर्ट ने VACB को एक SIT बनाने और सतर्कता अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर मामला दर्ज करने का निर्देश दिया है।
2. इस विवाद का मुख्य कारण क्या है?
मुख्य कारण ई-टेंडर प्रक्रिया को दरकिनार कर मिल्मा से ऊंचे दामों पर घी की खरीद और उसमें संभावित वित्तीय हेराफेरी है।