कर्नाटक उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा की गई तलाशी और संपत्ति की जब्ती की कार्रवाई स्वतंत्र नागरिक कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह आपराधिक जांच का ही एक हिस्सा है। अदालत ने कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग की जांच को अपराध से अलग नहीं किया जा सकता।

मुख्य बातें

  • कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा कि ED की तलाशी और जब्ती आपराधिक जांच का ही विस्तार है।
  • अदालत ने ED के उस तर्क को खारिज कर दिया जिसमें इसे 'सिविल कार्रवाई' बताया गया था।
  • ECIR को केवल एक 'प्रशासनिक दस्तावेज' कहना संवैधानिक रूप से गलत है।
  • PMLA के तहत संपत्ति की जब्ती मनी लॉन्ड्रिंग अपराध की जांच में सहायक उपकरण है।

बेंगलुरु: कर्नाटक उच्च न्यायालय ने बुधवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) के एक महत्वपूर्ण तर्क को खारिज करते हुए कहा कि धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 17 के तहत तलाशी और जब्ती की कार्रवाई को आपराधिक जांच से अलग कोई स्वतंत्र 'सिविल कार्रवाई' नहीं माना जा सकता।

न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना ने ऑनलाइन गेमिंग कंपनी गेम्सक्राफ्ट टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह महत्वपूर्ण टिप्पणी की। ED ने तर्क दिया था कि संपत्ति की जब्ती और फ्रीजिंग की प्रक्रिया सिविल प्रकृति की होती है, इसलिए इसे केवल सिविल क्षेत्राधिकार के तहत ही चुनौती दी जा सकती है। हालांकि, अदालत ने इस तर्क को पूरी तरह से खारिज कर दिया।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह फैसला ED की शक्तियों और उसकी जांच प्रक्रिया की कानूनी प्रकृति को परिभाषित करने में मील का पत्थर साबित होगा। यदि ED की कार्रवाइयों को केवल 'सिविल' मान लिया जाता, तो आपराधिक जांच के दौरान मिलने वाले कड़े कानूनी सुरक्षा उपायों और जवाबदेही को कम किया जा सकता था।

'अपराध का आधार (Predicate Offence) कंकाल है; ECIR उसका मांस और रक्त है। बिना कंकाल के मांस और रक्त का अस्तित्व असंभव है।'

अदालत ने आगे कहा कि PMLA का उद्देश्य केवल संपत्ति को विनियमित करना नहीं है, बल्कि आपराधिक गतिविधियों से उत्पन्न अपराध की कमाई (Proceeds of Crime) को पहचानना, ट्रैक करना और जब्त करना है। अदालत ने ECIR को केवल एक 'आंतरिक प्रशासनिक दस्तावेज' मानने से भी इनकार कर दिया, क्योंकि यह गिरफ्तारी और संपत्ति की जब्ती जैसे गंभीर अधिकार प्रदान करता है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

PMLA को भारत में वित्तीय अपराधों और मनी लॉन्ड्रिंग से निपटने के लिए सबसे सख्त कानूनों में से एक माना जाता है। समय-समय पर विभिन्न अदालतों ने इसकी शक्तियों और ECIR की प्रकृति पर सवाल उठाए हैं, लेकिन यह निर्णय जांच एजेंसी की प्रक्रियात्मक अखंडता को मजबूती प्रदान करता है।

क्या आप जानते हैं?: PMLA के तहत, जब तक आरोपी अपनी बेगुनाही साबित नहीं कर देता, तब तक अपराध की कमाई से अर्जित संपत्ति को जब्त करना आसान होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. ECIR क्या है?
ECIR (Enforcement Case Information Report) वह दस्तावेज है जो मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू करने के लिए तैयार किया जाता है, यह FIR के समान कार्य करता है।

2. अदालत ने ED के किस तर्क को खारिज किया?
ED ने कहा था कि उनकी तलाशी कार्रवाई एक सिविल मामला है, जिसे अदालत के सिविल बेंच में चुनौती दी जानी चाहिए, जिसे कोर्ट ने गलत बताया।