पटना उच्च न्यायालय ने बिहार में ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं, जिसमें रात 9:55 बजे के बाद लाउडस्पीकर पर पूर्ण प्रतिबंध और प्रेशर हॉर्न बजाने वालों पर भारी जुर्माने का प्रावधान है।
- रात 9:55 बजे के बाद लाउडस्पीकर और डीजे के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध।
- अस्पतालों और स्कूलों के पास 'साइलेंस ज़ोन' अनिवार्य करना।
- प्रेशर हॉर्न का उपयोग करने वाले वाहनों पर मोटर वाहन अधिनियम के तहत चालान।
- सभी डीजे और मैरिज हॉल संचालकों का स्थानीय एसडीओ के पास पंजीकरण अनिवार्य।
पटना उच्च न्यायालय ने बिहार में बढ़ते ध्वनि प्रदूषण पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए राज्यव्यापी कड़े निर्देश जारी किए हैं। न्यायमूर्ति राजीव रॉय की अध्यक्षता वाली एकल पीठ ने डीजे, उच्च डेसिबल वाले लाउडस्पीकर और प्रेशर हॉर्न के अनियंत्रित उपयोग को रोकने के लिए एक व्यापक दिशा-निर्देश जारी किया है। यह आदेश एक अवमानना याचिका की सुनवाई समाप्त करते हुए दिया गया था।
न्यायालय ने सभी जिलाधिकारियों (DM), पुलिस अधीक्षकों (SP), अनुमंडल अधिकारियों (SDO) और थाना प्रभारियों (SHO) को निर्देश दिया है कि वे ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम, 2000 और मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के प्रावधानों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें। अदालत ने स्पष्ट किया है कि रात 9:55 बजे के बाद किसी भी प्रकार के लाउडस्पीकर के उपयोग की अनुमति नहीं दी जाएगी।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह निर्णय न केवल सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि सड़क सुरक्षा की दृष्टि से भी क्रांतिकारी साबित हो सकता है। प्रेशर हॉर्न से होने वाली आवाज़ अक्सर ड्राइवरों का ध्यान भटकाती है और दुर्घटनाओं का कारण बनती है। अदालत ने कटिहार के पोथिया का उदाहरण देते हुए बताया कि इस तरह के अभियानों से राजस्व भी बढ़ेगा और सड़क सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।
'बिहार को प्रेशर हॉर्न से मुक्त किया जाना चाहिए,' यह टिप्पणी अदालत ने ध्वनि प्रदूषण के गंभीर प्रभावों को देखते हुए की।
अदालत के आदेशानुसार, अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों के पास 'साइलेंस ज़ोन' बनाए जाएंगे। डीजे ऑपरेटरों को इन क्षेत्रों से गुजरते समय पूरी तरह से 'साइलेंट मोड' में रहना होगा। इसके अतिरिक्त, सभी डीजे ऑपरेटरों, मैरिज हॉल मालिकों और साउंड सिस्टम संचालकों को स्थानीय एसडीओ के पास अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराना होगा।
बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सार्वजनिक स्थानों पर ध्वनि निगरानी प्रणाली और डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड लगाने का निर्देश दिया गया है ताकि जनता में जागरूकता पैदा की जा सके। अदालत ने यह भी सुझाव दिया कि शहरों को औद्योगिक, वाणिज्यिक, आवासीय और साइलेंस ज़ोन में वर्गीकृत किया जाना चाहिए।
Frequently Asked Questions
1. रात में लाउडस्पीकर बजाने की समय सीमा क्या है?
न्यायालय के आदेशानुसार, रात 9:55 बजे के बाद लाउडस्पीकर का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित है।
2. क्या डीजे संचालकों को पंजीकरण कराना होगा?
हाँ, सभी डीजे और साउंड सिस्टम संचालकों को अपने स्थानीय एसडीओ के पास पंजीकरण कराना अनिवार्य है।