केरल उच्च न्यायालय ने कुथिरावट्टोम, तिरुवनंतपुरम और त्रिशूर के सरकारी मानसिक स्वास्थ्य केंद्रों में जर्जर बुनियादी ढांचे और कर्मचारियों की कमी पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने स्वास्थ्य और समाज कल्याण विभागों से तत्काल सुधारात्मक कदमों पर रिपोर्ट मांगी है।

  • केरल उच्च न्यायालय ने कुथिरावट्टोम मानसिक स्वास्थ्य केंद्र की दयनीय स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की।
  • अदालत ने स्वास्थ्य और समाज कल्याण सचिवों से बुनियादी ढांचे में सुधार पर रिपोर्ट मांगी है।
  • अस्पतालों में सुरक्षाकर्मियों, रसोइयों और सफाई कर्मचारियों की भारी कमी पाई गई।
  • न्यायाधीशों ने कहा कि वर्तमान स्थितियां मरीजों को ठीक करने के बजाय उनके मानसिक स्वास्थ्य को और बिगाड़ सकती हैं।

केरल उच्च न्यायालय ने कोझिकोड के कुथिरावट्टोम स्थित सरकारी मानसिक स्वास्थ्य केंद्र की दयनीय स्थिति पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। न्यायमूर्ति देवन रामचंद्रन और न्यायमूर्ति बसंत बालाजी की खंडपीठ ने अस्पताल के निरीक्षण के बाद राज्य सरकार से तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की मांग की है। अदालत ने स्वास्थ्य विभाग और समाज कल्याण विभाग के संबंधित सचिवों को निर्देश दिया है कि वे मरीजों के लिए बुनियादी ढांचे में सुधार हेतु उठाए जा रहे कदमों पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करें।

निरीक्षण के दौरान, न्यायाधीशों ने पाया कि कुथिरावट्टोम की स्थिति तिरुवनंतपुरम और त्रिशूर के केंद्रों के समान ही चिंताजनक है। अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड और सेल (कोठरियाँ) अत्यंत पुराने और जर्जर हैं। परिसर में रोशनी की भारी कमी है और सुरक्षा के लिए एक मजबूत चारदीवारी का अभाव है। इसके अलावा, अस्पताल में कर्मचारियों की भारी कमी है, जिसमें सुरक्षाकर्मी, रसोइये और सफाई कर्मचारी शामिल हैं।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows कि मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों की यह स्थिति मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है। जब उपचार के लिए बनाए गए स्थान ही मरीजों के लिए तनाव का कारण बन जाएं, तो चिकित्सा का मूल उद्देश्य ही समाप्त हो जाता है। अदालत का यह हस्तक्षेप न केवल बुनियादी ढांचे में सुधार लाएगा, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य देखभाल के प्रति राज्य की जवाबदेही भी तय करेगा।

मानसिक स्वास्थ्य संस्थान अलगाव की जगह नहीं, बल्कि सामान्य स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा होने चाहिए जहाँ मरीजों को समान अधिकार मिलें।

अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि केवल भौतिक संरचना ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक सुधार भी आवश्यक हैं। इसमें कर्मचारियों के रिक्त पदों को भरना और मरीजों का आधार नामांकन पूरा करना शामिल है। त्रिशूर केंद्र के निरीक्षण के दौरान, न्यायाधीशों ने टिप्पणी की कि वहां की आवास सुविधाएं मरीजों के दिमाग को ठीक करने के बजाय उन्हें और अधिक मानसिक आघात पहुँचाने वाली हैं।

यह मामला केवल एक अस्पताल की बदहाली का नहीं है, बल्कि यह मानसिक स्वास्थ्य के प्रति समाज और सरकार के दृष्टिकोण को दर्शाता है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि चाहे किसी व्यक्ति को शारीरिक बीमारी हो या मानसिक, कानून उन्हें समान अधिकार और सम्मानजनक उपचार की गारंटी देता है।

Did You Know?: मानसिक स्वास्थ्य देखभाल को अब वैश्विक स्तर पर 'समग्र स्वास्थ्य' (Holistic Health) का अभिन्न अंग माना जाता है, न कि केवल एक अलग श्रेणी।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: उच्च न्यायालय ने किन केंद्रों का निरीक्षण किया?
उत्तर: न्यायालय ने कुथिरावट्टोम (कोझिकोड), तिरुवनंतपुरम और त्रिशूर स्थित सरकारी मानसिक स्वास्थ्य केंद्रों का निरीक्षण किया।

प्रश्न 2: अदालत ने सरकार से क्या मुख्य मांगें की हैं?
उत्तर: अदालत ने बुनियादी ढांचे में सुधार, कर्मचारियों की कमी को दूर करने और मरीजों के आधार नामांकन को पूरा करने की मांग की है।