राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एस.पी. शर्मा के खिलाफ 'शक्ति के दुरुपयोग' के आरोपों ने कानूनी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति संदीप मेहता के हस्तक्षेप के बाद, राज्य के वकील संघों ने इस मामले पर गहरी चिंता व्यक्त की है।
- सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति संदीप मेहता ने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ पत्र लिखकर उनकी सत्यनिष्ठा पर सवाल उठाए हैं।
- राजस्थान के तीन प्रमुख वकील संघों ने एक आपातकालीन बैठक कर शक्ति के दुरुपयोग की कड़ी निंदा की है।
- जोधपुर बार ने जयपुर बेंच को न्यायाधीश आवंटित करने के निर्णय पर भी आपत्ति जताई है।
राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश, न्यायमूर्ति एस.पी. शर्मा के खिलाफ हालिया आरोपों ने राज्य की न्यायिक व्यवस्था में एक बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति संदीप मेहता द्वारा भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को लिखे गए तीन पत्रों ने इस विवाद को और हवा दी है। न्यायमूर्ति मेहता ने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की सत्यनिष्ठा पर संदेह जताते हुए उन्हें स्थानांतरित करने और एक नए मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति की मांग की है।
न्यायिक गरिमा पर संकट
इस मामले की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, जयपुर और जोधपुर के दो अन्य प्रमुख वकील संघों ने एक आपातकालीन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग बैठक बुलाई। इन संघों ने एक संयुक्त बयान जारी करते हुए कहा कि वे न्यायपालिका के भीतर किसी भी पद या संस्थागत व्यवस्था के कथित दुरुपयोग की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं। वकीलों का मानना है कि यह मामला न्यायपालिका की स्वतंत्रता और गरिमा से जुड़ा है, जिसे अत्यंत गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
न्यायपालिका की निष्पक्षता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए संस्थागत जांच और पारदर्शिता अनिवार्य है।
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह विवाद केवल एक व्यक्ति के विरुद्ध नहीं है, बल्कि यह 'बार और बेंच' (वकीलों और न्यायाधीशों) के बीच बिगड़ते संबंधों का भी संकेत है। वकीलों ने पूर्व में भी दिसंबर 2025 और अप्रैल में पत्र लिखकर एक स्थायी मुख्य न्यायाधीश की मांग की थी, ताकि प्रशासनिक शून्यता और शक्तियों के अत्यधिक प्रयोग को रोका जा सके।
जोधपुर बनाम जयपुर: शक्ति संतुलन का मुद्दा
विवाद केवल आरोपों तक सीमित नहीं है। जोधपुर स्थित वकील संघों ने इस बात पर भी रोष जताया है कि जोधपुर (मुख्य पीठ) में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने की मांग के बावजूद, दो न्यायाधीशों को जयपुर बेंच के लिए नामित कर दिया गया है। वकीलों का तर्क है कि जोधपुर में मुकदमों का बोझ अधिक है और वहां न्यायिक शक्ति कम करना संस्थागत अपेक्षाओं के विपरीत है।
| मुद्दा | वकीलों का पक्ष | वर्तमान स्थिति |
|---|---|---|
| मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति | स्थायी मुख्य न्यायाधीश की तत्काल आवश्यकता | कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश कार्यरत हैं |
| न्यायिक शक्ति का वितरण | जोधपुर (मुख्य पीठ) को अधिक न्यायाधीश चाहिए | जयपुर बेंच को नए न्यायाधीश आवंटित किए गए |
| न्यायपालिका की गरिमा | शक्ति के दुरुपयोग की निंदा | सुप्रीम कोर्ट द्वारा जांच की मांग |
वकीलों ने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश से पांच प्रमुख मांगें की हैं, जिसमें न्यायाधीशों के आवंटन पर पुनर्विचार करना और जोधपुर में न्यायिक शक्ति को बढ़ाना शामिल है। आगामी दिनों में वकील संघों की एक संयुक्त बैठक इस मामले में अगली रणनीति तय करेगी।
Frequently Asked Questions
1. न्यायमूर्ति संदीप मेहता ने क्या मांग की है?
न्यायमूर्ति मेहता ने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के स्थानांतरण और एक नए मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति की मांग की है।
2. जोधपुर के वकीलों की मुख्य आपत्ति क्या है?
उनकी मुख्य आपत्ति न्यायाधीशों को जोधपुर के बजाय जयपुर बेंच में स्थानांतरित करने और मुख्य पीठ में न्यायाधीशों की कमी को लेकर है।