दिल्ली हाईकोर्ट ने बाल तस्करी मामले में मुख्य आरोपी नर्स को गिरफ्तार न करने के लिए पुलिस की आलोचना की है। अदालत ने पुलिस को 'चुनने और छोड़ने' की नीति अपनाने से सख्त हिदायत दी है।
- दिल्ली हाईकोर्ट ने बाल तस्करी मामले में पुलिस की 'पिक एंड चूज़' नीति की कड़ी आलोचना की।
- मुख्य आरोपी नर्स कुलविंदर कौर की गिरफ्तारी पर अदालत ने स्पष्टीकरण मांगा है।
- अदालत ने आदेश दिया है कि पीड़ित मासूम बच्ची को जल्द से जल्द बचाया जाए।
- मामले की प्रगति पर चार सप्ताह के भीतर स्टेटस रिपोर्ट मांगी गई है।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक चौंकाने वाले बाल तस्करी मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर तीखी टिप्पणी की है। न्यायमूर्ति गिरीश कठपालिया ने पुलिस द्वारा मुख्य आरोपी, एक नर्स को गिरफ्तार न करने की प्रवृत्ति को 'अस्वीकार्य' बताया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जांच एजेंसियां आरोपियों की गिरफ्तारी के मामले में 'पिक एंड चूज़' (किसी को चुनना और किसी को छोड़ना) की नीति नहीं अपना सकतीं।
यह मामला 2024 का है, जिसमें एक आरोपी जोड़े ने खुद को पति-पत्नी बताकर एक नवजात बच्ची की कस्टडी ली और बाद में उसे बेच दिया। सुनवाई के दौरान, आरोपी ने जमानत की मांग करते हुए तर्क दिया कि मुख्य संदिग्ध, नर्स कुलविंदर कौर, अभी तक पुलिस की पकड़ से बाहर है। इस पर अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि राज्य की यह नीति कि कुछ आरोपियों को गिरफ्तार किया जाए और दूसरों को छोड़ दिया जाए, न्यायसंगत नहीं है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि इस तरह की न्यायिक टिप्पणियां कानून प्रवर्तन एजेंसियों की जवाबदेही तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। यदि पुलिस गंभीर अपराधों में चुनिंदा गिरफ्तारियां करती है, तो यह न्याय प्रणाली के प्रति जनता के विश्वास को कमजोर करता है। यह मामला न केवल मानव तस्करी के खिलाफ लड़ाई को दर्शाता है, बल्कि यह भी रेखांकित करता है कि कैसे संस्थागत ढिलाई अपराधियों को बचने का मौका दे सकती है।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि पुलिस को यह साफ करना चाहिए कि वे किसी आरोपी को गिरफ्तार करना चाहते हैं या नहीं; वे केवल चुनिंदा कार्रवाई करके कानून से बच नहीं सकते।
अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि कुलविंदर कौर एक 'अयोग्य नर्स' है और उसे जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इस पर अदालत ने टिप्पणी की कि ऐसा लगता है कि अब राज्य को कथित अपराध की गंभीरता का एहसास हो रहा है। अदालत ने इस बात पर भी गहरा दुख व्यक्त किया कि एक नवजात बच्ची को उसके जैविक माता-पिता से अलग करने से उसके मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा और स्थायी प्रभाव पड़ता है।
न्यायमूर्ति कठपालिया ने संबंधित पुलिस उपायुक्त (DCP) को निर्देश दिया है कि वे सुनिश्चित करें कि मासूम बच्ची को जल्द से जल्द सुरक्षित रेस्क्यू किया जाए। अदालत ने इस मामले में चार सप्ताह के भीतर एक विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट भी तलब की है।
Frequently Asked Questions
1. दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस को क्या निर्देश दिया है?
अदालत ने पुलिस को मुख्य आरोपी नर्स की गिरफ्तारी का स्टेटस बताने और पीड़ित बच्ची को तुरंत रेस्क्यू करने का निर्देश दिया है।
2. 'पिक एंड चूज़' नीति से अदालत का क्या तात्पर्य है?
इसका अर्थ है पुलिस द्वारा जांच के दौरान कुछ आरोपियों को निशाना बनाना और कुछ प्रभावशाली या महत्वपूर्ण आरोपियों को छोड़ देना, जिसे अदालत ने गलत माना है।