मदुरै उच्च न्यायालय ने दक्षिण और मध्य जिलों के सरकारी अस्पतालों में अपशिष्ट उपचार संयंत्र (ETP) स्थापित करने की मांग वाली जनहित याचिका पर राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी है। याचिका में अस्पताल से निकलने वाले खतरनाक जैविक कचरे के प्रबंधन पर गंभीर चिंता जताई गई है।
- मदुरै उच्च न्यायालय ने सरकारी अस्पतालों में अपशिष्ट उपचार संयंत्रों (ETP) की स्थापना पर राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी है।
- याचिकाकर्ता ने मेडिकल कॉलेज, जिला मुख्यालय और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में कचरा प्रबंधन की कमी का मुद्दा उठाया है।
- अस्पताल के कचरे से होने वाले प्रदूषण और बीमारियों के खतरे पर गंभीर चेतावनी दी गई है।
मदुरै, तमिलनाडु: मदुरै स्थित मद्रास उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। यह याचिका अपने अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले दक्षिण और मध्य जिलों के सभी सरकारी अस्पतालों में अपशिष्ट उपचार संयंत्र (Effluent Treatment Plants - ETP) स्थापित करने की मांग करती है।
न्यायमूर्ति सी.वी. कार्तिकेयन और न्यायमूर्ति आर. शक्तिवेल की खंडपीठ ने आर. मणिभारती द्वारा दायर इस याचिका पर विचार किया। याचिकाकर्ता का तर्क है कि सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों, जिला मुख्यालय अस्पतालों, तालुक अस्पतालों, अपग्रेड किए गए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त क्षमता वाले अपशिष्ट उपचार संयंत्रों का होना अनिवार्य है।
बढ़ता स्वास्थ्य और पर्यावरणीय खतरा
याचिका में विस्तार से बताया गया है कि अस्पतालों से निकलने वाला बायोमेडिकल कचरा जैसे कि पैथोलॉजिकल कचरा, सूक्ष्मजीव संबंधी कचरा, रक्त से दूषित सामग्री, ऑपरेशन थिएटर का कचरा, प्रयोगशाला का कचरा, फेंकी गई दवाएं, मानव ऊतक, शरीर के अंग, ड्रेसिंग, नुकीली वस्तुएं और दूषित प्लास्टिक अत्यंत खतरनाक होते हैं।
यदि इन सामग्रियों का प्रबंधन कानून के तहत निर्धारित वैज्ञानिक मानकों के अनुसार नहीं किया जाता है, तो यह संक्रामक रोगों के प्रसार, भूजल के दूषित होने, पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंचाने और अस्पताल के कर्मचारियों, रोगियों, स्वच्छता कार्यकर्ताओं और आम जनता के जीवन को खतरे में डालने का गंभीर जोखिम पैदा करता है।
अस्पताल के कचरे का अनुचित निपटान न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध (AMR) को भी बढ़ावा देता है।
BozokMedia विश्लेषण
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे में स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। सरकारी अस्पतालों में ETP की कमी न केवल स्वच्छता मानकों का उल्लंघन है, बल्कि यह भविष्य में महामारी के जोखिम को भी कई गुना बढ़ा सकती है।
याचिकाकर्ता ने अधिकारियों से यह भी मांग की है कि वे सरकारी अस्पतालों में अपशिष्ट उपचार संयंत्रों के उचित कामकाज को सत्यापित करने के लिए नियमित निरीक्षण करें और 'ग्रीन और क्लाइमेट रेजिलिएंट हेल्थकेयर फैसिलिटीज' के दिशानिर्देशों का कड़ाई से कार्यान्वयन सुनिश्चित करें। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 8 अक्टूबर की तारीख तय की है।
Frequently Asked Questions
1. अपशिष्ट उपचार संयंत्र (ETP) क्या है?
ETP एक ऐसी प्रणाली है जो अस्पतालों और उद्योगों से निकलने वाले दूषित तरल कचरे को साफ करती है ताकि उसे पर्यावरण में छोड़ने से पहले सुरक्षित बनाया जा सके।
2. इस याचिका का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य दक्षिण और मध्य तमिलनाडु के सरकारी अस्पतालों में बायोमेडिकल कचरे के सुरक्षित निपटान के लिए बुनियादी ढांचा सुनिश्चित करना है।