केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री बीरेन सिंह से जुड़े ऑडियो क्लिप्स के साथ छेड़छाड़ की गई है। कोर्ट ने नागरिक समाज समूह को फोरेंसिक रिपोर्ट देखने की अनुमति दे दी है।
मुख्य बातें
- केंद्र सरकार ने दावा किया कि बीरेन सिंह के ऑडियो क्लिप 'हेरफेर' किए गए हैं।
- सुप्रीम कोर्ट ने एनजीओ को नेशनल फोरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी (NFSU) की रिपोर्ट साझा करने का निर्देश दिया।
- याचिकाकर्ता का दावा है कि पहले के परीक्षणों में 93% आवाज का मिलान पाया गया था।
- मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर को निर्धारित है।
नई दिल्ली: मणिपुर में जातीय हिंसा के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह की कथित भूमिका से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा रुख अपनाया है। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान, अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह 'कुकी ऑर्गनाइजेशन फॉर ह्यूमन राइट्स' (Kuki Organisation for Human Rights) नामक याचिकाकर्ता एनजीओ के साथ नेशनल फोरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी (NFSU) की नवीनतम रिपोर्ट साझा करे।
केंद्र और मणिपुर राज्य का प्रतिनिधित्व करते हुए, एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अदालत के समक्ष तर्क दिया कि व्हिसलब्लोअर द्वारा जारी किए गए ऑडियो क्लिप्स के पहले संस्करण में भी स्पष्ट रूप से बदलाव और हेरफेर पाया गया है। सरकार ने इस आधार पर याचिका को खारिज करने की मांग की है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह मामला न केवल मणिपुर में हुई हिंसा की जांच के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह डिजिटल साक्ष्यों की प्रामाणिकता पर भी एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। यदि ऑडियो क्लिप्स वास्तव में हेरफेर किए गए हैं, तो यह जांच की दिशा बदल सकता है, लेकिन यदि वे असली हैं, तो यह राज्य के शीर्ष नेतृत्व की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाता है।
डिजिटल फोरेंसिक रिपोर्टों में विरोधाभास अक्सर कानूनी लड़ाई को और अधिक जटिल और लंबा बना देता है।
दूसरी ओर, याचिकाकर्ता एनजीओ की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने केंद्र के दावों का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने अदालत को बताया कि ट्रुथ लैब्स (Truth Labs) द्वारा किए गए पिछले परीक्षणों में बीरेन सिंह की आवाज के साथ 93% समानता पाई गई थी। हालांकि, अदालत ने इस रिपोर्ट की गोपनीयता बनाए रखने पर सहमति जताई है, लेकिन भूषण ने कहा कि वे अगली सुनवाई में इन निष्कर्षों का खंडन करेंगे।
गौरतलब है कि मई 2023 में शुरू हुई मणिपुर की जातीय हिंसा में 260 से अधिक लोग मारे गए थे और हजारों लोग विस्थापित हुए थे। याचिकाकर्ता ने इस पूरे मामले की जांच एक स्वतंत्र एसआईटी (SIT) द्वारा कराने की मांग की है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. विवाद का मुख्य कारण क्या है?
विवाद उन ऑडियो क्लिप्स को लेकर है जिनमें कथित तौर पर पूर्व सीएम बीरेन सिंह मणिपुर हिंसा में शामिल थे।
2. केंद्र सरकार का क्या रुख है?
केंद्र का कहना है कि ये ऑडियो क्लिप्स असली नहीं हैं और इनमें छेड़छाड़ की गई है।