हरियाणा के फतेहाबाद जिला उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी की लापरवाही के खिलाफ कड़ा फैसला सुनाते हुए एक विधवा को 50 लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है। कंपनी ने पति की मृत्यु के बाद भी क्लेम को गलत तरीके से खारिज कर दिया था।

मुख्य बातें

  • फतेहाबाद उपभोक्ता आयोग ने Cigna TTK हेल्थ इंश्योरेंस को 50 लाख रुपये देने का आदेश दिया।
  • बीमा कंपनी ने पति की मृत्यु के बाद भी क्लेम को गलत तरीके से खारिज किया था।
  • आयोग ने कंपनी को सेवा में कमी और मानसिक उत्पीड़न का दोषी पाया।
  • अदालत ने 20,000 रुपये मुकदमेबाजी लागत भी देने का निर्देश दिया।

हरियाणा के फतेहाबाद जिला उपभोक्ता आयोग ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए Cigna TTK हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी को एक विधवा को 50 लाख रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया है। यह मामला एक व्यक्ति के गंभीर बीमारी (Critical Illness) के क्लेम को गलत तरीके से खारिज करने से जुड़ा था, जिसके कारण उसकी विधवा को भारी मानसिक और आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ा।

आयोग के अध्यक्ष गुलाब सिंह और सदस्य ओ पी टुटेजा की पीठ ने पाया कि बीमा कंपनी ने सेवा में भारी कमी बरती है। आयोग ने टिप्पणी की कि यदि कंपनी ने समय पर क्लेम का भुगतान कर दिया होता, तो महिला उस राशि का उपयोग अपने लाभ के लिए कर पाती। कंपनी ने न केवल क्लेम खारिज किया, बल्कि कानूनी नोटिस मिलने के बावजूद कोई जवाब नहीं दिया।

क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह मामला बीमा कंपनियों की मनमानी कार्यप्रणाली पर एक कड़ा प्रहार है। अक्सर कंपनियां मेडिकल रिकॉर्ड में मामूली विसंगतियों का हवाला देकर क्लेम खारिज कर देती हैं, लेकिन इस मामले में आयोग ने स्पष्ट किया कि अस्पताल के रिकॉर्ड की कमी के लिए मरीज या उसके परिवार को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

बीमा कंपनियां केवल अस्पष्ट आधारों पर क्लेम खारिज नहीं कर सकतीं; उन्हें धोखाधड़ी या पहले से मौजूद बीमारी को साबित करना अनिवार्य है।

मामले के अनुसार, मृतक ने 'लाइफस्टाइल प्रोटेक्शन-क्रिटिकल केयर बेसिक' पॉलिसी ली थी। हृदय रोग के कारण अस्पताल में भर्ती होने के बाद क्लेम किया गया था, जिसे कंपनी ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि मेडिकल मानदंड पूरे नहीं हुए। हालांकि, आयोग ने पाया कि कंपनी ने बिना तथ्यों की जांच किए लापरवाही से क्लेम खारिज किया, क्योंकि कंपनी के अपने रिकॉर्ड के अनुसार क्लेम मृत्यु के एक महीने बाद भी लंबित था।

क्या आप जानते हैं?: यदि कोई बीमा कंपनी आपके क्लेम को गलत तरीके से खारिज करती है, तो आप राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन नंबर 1915 पर कॉल करके सहायता प्राप्त कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. क्या अस्पताल के रिकॉर्ड में कमी के कारण बीमा क्लेम खारिज किया जा सकता है?
नहीं, आयोग के अनुसार, अस्पताल के रिकॉर्ड बनाए रखना अस्पताल की जिम्मेदारी है, मरीज की नहीं।

2. उपभोक्ता आयोग के पास शिकायत करने के लिए क्या करना चाहिए?
आप अपने राज्य की उपभोक्ता हेल्पलाइन या राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन 1915 पर संपर्क कर सकते हैं।