दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया है कि वे महिला कर्मियों के लिए सभी थानों में सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीनें और अलग वॉशरूम की सुविधा सुनिश्चित करें।
मुख्य बातें
- दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस को सभी पुलिस थानों में सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीनें लगाने का आदेश दिया है।
- महिला पुलिसकर्मियों के लिए अलग और निजी वॉशरूम की सुविधा अनिवार्य की गई है।
- पुलिस कमिश्नर को 6 सप्ताह के भीतर सभी थानों का सर्वेक्षण करने का निर्देश दिया गया है।
- यह आदेश 'जस्टिस फॉर राइट्स फाउंडेशन' द्वारा दायर जनहित याचिका पर आया है।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाते हुए दिल्ली पुलिस को राजधानी के सभी पुलिस स्टेशनों में महिला कर्मियों के लिए सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीनें स्थापित करने और उन्हें विशेष वॉशरूम प्रदान करने का निर्देश दिया है।
अदालत का सख्त रुख
मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया है कि वे छह सप्ताह के भीतर सभी पुलिस स्टेशनों का सर्वेक्षण करें। इस सर्वेक्षण का उद्देश्य यह पता लगाना है कि वर्तमान में कितने स्टेशनों पर विशेष वॉशरूम और सैनिटरी पैड की सुविधा उपलब्ध है। सर्वेक्षण के बाद, पुलिस को उचित कदम उठाने होंगे और अदालत को एक हलफनामा पेश करना होगा।
क्यों है यह महत्वपूर्ण?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह निर्णय केवल बुनियादी ढांचे के बारे में नहीं है, बल्कि कार्यस्थल पर महिलाओं की गरिमा और स्वास्थ्य से जुड़ा है। लंबे समय से महिला पुलिसकर्मी बुनियादी स्वच्छता सुविधाओं के अभाव से जूझ रही थीं, जो उनके काम करने की क्षमता और स्वास्थ्य को प्रभावित करता था।
कार्यस्थल पर स्वच्छता और मासिक धर्म स्वच्छता (menstrual hygiene) सुनिश्चित करना केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि मौलिक अधिकार है।
यह मामला 'जस्टिस फॉर राइट्स फाउंडेशन' नामक एनजीओ द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) के माध्यम से सामने आया। याचिका में तर्क दिया गया कि स्वच्छता सुविधाओं का अभाव संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गरिमा के साथ जीने के अधिकार का उल्लंघन है। आरटीआई (RTI) से प्राप्त जानकारी के अनुसार, दिल्ली में हजारों महिला पुलिसकर्मी तैनात हैं, लेकिन केवल कुछ ही स्थानों पर वेंडिंग मशीनें उपलब्ध थीं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत में कार्यस्थल पर महिलाओं की स्वच्छता को लेकर कानूनी लड़ाई दशकों से चल रही है। हाल के वर्षों में, कई अदालतों ने मासिक धर्म स्वच्छता को स्वास्थ्य और गरिमा से जोड़ते हुए इसे अनिवार्य बनाने पर जोर दिया है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. अदालत ने पुलिस को कितना समय दिया है?
अदालत ने पुलिस आयुक्त को 6 सप्ताह के भीतर सर्वेक्षण पूरा करने का निर्देश दिया है।
2. यह याचिका किसने दायर की थी?
यह याचिका 'जस्टिस फॉर राइट्स फाउंडेशन' नामक एनजीओ द्वारा दायर की गई थी।