2020 उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में, दिल्ली हाईकोर्ट ने दो दोषियों की अपील पर पुलिस से जवाब मांगा है। अदालत ने सजा के निलंबन की याचिका पर भी नोटिस जारी किया है।

मुख्य बातें

  • दिल्ली हाईकोर्ट ने आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में दो दोषियों की अपील स्वीकार की।
  • अदालत ने पुलिस और अभियोजन पक्ष को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
  • दोषियों ने सजा के निलंबन (suspension of sentence) के लिए भी याचिका दायर की है।
  • मामले की अगली सुनवाई 2 दिसंबर को निर्धारित की गई है।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह और न्यायमूर्ति विकास महाजन की पीठ ने दो दोषियों, नाज़िम और कासिम की अपील को स्वीकार करते हुए दिल्ली पुलिस से इस पर अपना रुख स्पष्ट करने को कहा है।

दोषियों के वकील ने अदालत में दलील दी कि उनके मुवक्किलों के खिलाफ कोई 'टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड' (TIP) नहीं कराई गई थी और गवाहों के बयानों की पुष्टि करने के लिए कोई स्वतंत्र सामग्री उपलब्ध नहीं है। यह मामला 2020 के दंगों की उस भयावह घटना से जुड़ा है, जिसमें एक भीड़ ने अधिकारी पर हमला किया और उनके शव को नाले में फेंक दिया था।

यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह मामला न केवल कानून व्यवस्था की विफलता को दर्शाता है, बल्कि यह भी रेखांकित करता है कि दंगों के दौरान कानून का शासन कितना नाजुक हो जाता है। पूर्व एएपी पार्षद ताहिर हुसैन की सजा और इस मामले में छह अन्य आरोपियों के बरी होने के फैसले ने पहले ही कानूनी हलकों में बहस छेड़ दी है।

दंगों के मामलों में पहचान परेड की कमी और साक्ष्यों का अभाव अक्सर दोषसिद्धि को चुनौती देने का मुख्य आधार बनता है।

गौरतलब है कि निचली अदालत ने ताहिर हुसैन और चार अन्य को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। अभियोजन पक्ष ने इन आरोपियों को 'जानवरों के समान' बताते हुए मृत्युदंड की मांग की थी। वहीं, राज्य ने उन छह आरोपियों के खिलाफ भी अपील करने की बात कही है जिन्हें अदालत ने बरी कर दिया था।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगे सांप्रदायिक तनाव का एक काला अध्याय थे। अंकित शर्मा, जो एक आईबी अधिकारी थे, की हत्या इस हिंसा का एक अत्यंत दुखद हिस्सा थी। उनके पिता, रविंदर कुमार की शिकायत के आधार पर दयालपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

क्या आप जानते हैं?: दंगों के दौरान हुई हिंसा के मामलों में 'पहचान परेड' (Test Identification Parade) कानून की प्रक्रिया का एक अनिवार्य हिस्सा है ताकि गवाहों की विश्वसनीयता सुनिश्चित की जा सके।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. अंकित शर्मा कौन थे?
अंकित शर्मा इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) में तैनात एक अधिकारी थे, जिनकी हत्या 2020 के दिल्ली दंगों के दौरान हुई थी।

2. दोषियों ने अदालत से क्या मांग की है?
दोषियों ने अपनी सजा के निलंबन (suspension of sentence) और मामले की पुन: सुनवाई की मांग की है।