केरल उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए कहा है कि वन्यजीव अभयारण्यों, राष्ट्रीय उद्यानों या टाइगर रिजर्व में व्यावसायिक फिल्में और टेलीविजन सीरियल शूट करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। यह फैसला मलयालम फिल्म निर्माता तरुण मूर्ति की याचिका पर आया है।
- वन्यजीव अभयारण्यों और टाइगर रिजर्व में व्यावसायिक शूटिंग पर न्यायालय ने प्रतिबंध लगाया है।
- यह निर्णय मलयालम फिल्म निर्माता तरुण मूर्ति की याचिका पर आया है।
- न्यायालय ने पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीवों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है।
केरल उच्च न्यायालय ने एक ऐतिहासिक टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया है कि वन्यजीव अभयारण्यों, राष्ट्रीय उद्यानों या टाइगर रिजर्व में व्यावसायिक फिल्मों और टेलीविजन धारावाहिकों की शूटिंग के लिए अनुमति प्रदान नहीं की जा सकती है। न्यायालय का यह निर्णय प्रकृति और वन्यजीवों के संरक्षण के प्रति सख्त रुख को दर्शाता है।
यह मामला प्रसिद्ध मलयालम फिल्म निर्माता तरुण मूर्ति द्वारा दायर की गई एक याचिका से जुड़ा है। मूर्ति अपनी आगामी फिल्म "Athimanoharam" (जिसमें सुपरस्टार मोहनलाल मुख्य भूमिका में हैं) की शूटिंग के लिए कुछ विशिष्ट स्थानों पर अनुमति चाहते थे। याचिका में रन्नी के प्रभागीय वन अधिकारी और पीरмеडू के उप निदेशक से अनुरोध किया गया था कि वे शूटिंग की अनुमति प्रदान करें।
मामले की पृष्ठभूमि
मामले की जटिलता तब बढ़ गई जब यह पता चला कि फिल्म निर्माता द्वारा मांगे गए स्थान पेरियार टाइगर रिजर्व (PTR) का हिस्सा थे। पेरियार टाइगर रिजर्व का क्षेत्र त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड को सबरीमाला तीर्थयात्रा की सुविधा के लिए लीज पर दिया गया है। हालांकि देवस्वम बोर्ड ने शूटिंग की अनुमति दे दी थी, लेकिन यह शर्त रखी गई थी कि वन अधिकारियों से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
न्यायालय की खंडपीठ, जिसमें न्यायमूर्ति राजा वी. विजयराघवन और न्यायमूर्ति के.वी. जयकुमार शामिल थे, ने याचिका को खारिज कर दिया। हालांकि, अदालत ने यह भी नोट किया कि याचिकाकर्ता उप निदेशक के निर्णय को चुनौती देने के लिए स्वतंत्र हैं।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह निर्णय मनोरंजन उद्योग और पर्यावरण संरक्षण के बीच चल रहे संघर्ष को रेखांकित करता है। फिल्मों के लिए अक्सर भव्य दृश्यों की आवश्यकता होती है, लेकिन वन्यजीव क्षेत्रों में मानवीय हस्तक्षेप, शोर और कचरा पारिस्थितिकी तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। यह फैसला भविष्य में फिल्म निर्माण के लिए नए प्रोटोकॉल निर्धारित करेगा।
वन्यजीव क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियां पारिस्थितिक संतुलन को बाधित कर सकती हैं, इसलिए कानूनी सुरक्षा कवच अनिवार्य है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या अब फिल्मों की शूटिंग पूरी तरह प्रतिबंधित है?
उत्तर: यह निर्णय विशेष रूप से वन्यजीव अभयारण्यों, राष्ट्रीय उद्यानों और टाइगर रिजर्व में 'व्यावसायिक' शूटिंग पर लागू होता है।
प्रश्न 2: क्या फिल्म निर्माता इस फैसले को चुनौती दे सकते हैं?
उत्तर: हाँ, न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि याचिकाकर्ता उप निदेशक के निर्णय के खिलाफ कानूनी चुनौती दे सकते हैं।