दिल्ली उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि अस्थायी वेंडिंग सर्टिफिकेट (CoV) रखने वाले विक्रेता निश्चित स्थानों की मांग नहीं कर सकते। अदालत ने फुटपाथ अतिक्रमण और यातायात बाधाओं पर भी सख्त टिप्पणी की है।
- प्रोविजनल सर्टिफिकेट (CoV) धारक निश्चित वेंडिंग साइट का दावा नहीं कर सकते।
- अदालत ने पाया कि कई विक्रेता मोबाइल वेंडर के बजाय स्थायी दुकानों की तरह अतिक्रमण कर रहे हैं।
- MCD को निर्देश दिया गया है कि वह सभी 42 याचिकाकर्ताओं के प्रमाण पत्रों की जांच करे।
- नियमों का उल्लंघन करने वाले विक्रेताओं को हटाया जा सकता है।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए कहा है कि जिन स्ट्रीट वेंडर्स के पास प्रोविजनल सर्टिफिकेट ऑफ वेंडिंग (CoV) है, वे किसी निश्चित या स्थायी वेंडिंग साइट के अधिकार का दावा नहीं कर सकते। न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह और न्यायमूर्ति विकास महाजन की पीठ ने यह स्पष्ट किया कि ये प्रमाण पत्र विशिष्ट नियमों और शर्तों के अधीन हैं, जो स्ट्रीट वेंडिंग के प्रबंधन के लिए बनाए गए हैं।
यह मामला 42 व्यक्तियों द्वारा दायर एक याचिका से जुड़ा है, जिन्होंने दावा किया था कि उनके पास प्रोविजनल CoVs हैं और उन्होंने अधिकारियों से उन्हें वेंडिंग के लिए सटीक साइटें आवंटित करने का निर्देश देने की मांग की थी। हालांकि, नगर निगम दिल्ली (MCD) ने अदालत में तर्क दिया कि याचिकाकर्ता केवल मोबाइल वेंडर हैं और उनके पास कोई भी ऐसी पहचान वाली स्थिर साइट नहीं है जिसे उन्हें आवंटित किया जा सके।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह फैसला शहरी नियोजन और अनौपचारिक अर्थव्यवस्था के बीच संतुलन बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यदि प्रोविजनल सर्टिफिकेट धारकों को स्थायी साइटें दी जाने लगीं, तो इससे शहरों में अतिक्रमण की समस्या और भी गंभीर हो सकती है, जिससे पैदल यात्रियों और यातायात को भारी असुविधा होगी।
अदालत का रुख स्पष्ट है: अस्थायी अधिकार को स्थायी स्वामित्व का आधार नहीं बनाया जा सकता।
अदालत ने रिकॉर्ड पर रखे गए फोटोग्राफों का अवलोकन करते हुए पाया कि याचिकाकर्ता वास्तव में मोबाइल वेंडर के रूप में कार्य नहीं कर रहे थे, बल्कि वे स्थायी दुकानों की तरह संचालन कर रहे थे। इससे न केवल फुटपाथों और चलने वाले रास्तों पर अतिक्रमण हो रहा था, बल्कि इससे यातायात में भी भारी जाम लग रहा था। अदालत ने 3 अगस्त के अपने पिछले आदेश में यह भी कहा था कि वेंडिंग साइटों का रखरखाव स्वच्छ और स्वच्छ तरीके से नहीं किया जा रहा है।
न्यायालय ने रेखांकित किया कि प्रोविजनल CoVs में कई अनिवार्य शर्तें शामिल हैं। वेंडर्स को टाउन वेंडिंग कमेटी (TVC) द्वारा निर्धारित बिक्री समय और ज़ोन का पालन करना होगा, यह सुनिश्चित करना होगा कि पैदल यात्रियों और यातायात की आवाजाही में कोई बाधा न आए, और किसी भी प्रकार के अतिक्रमण से बचना होगा।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत में स्ट्रीट वेंडिंग का विनियमन 'स्ट्रीट वेंडर्स (आजीविका का संरक्षण और स्ट्रीट वेंडिंग का विनियमन) अधिनियम, 2014' के तहत किया जाता है। यह अधिनियम वेंडर्स के अधिकारों और स्थानीय निकायों के कर्तव्यों के बीच एक संतुलन बनाने का प्रयास करता है, लेकिन अक्सर 'प्रोविजनल' और 'परमानेंट' सर्टिफिकेट के बीच कानूनी संघर्ष देखने को मिलता है।
Frequently Asked Questions
1. क्या प्रोविजनल CoV वाले वेंडर कहीं भी सामान बेच सकते हैं?
नहीं, उन्हें टाउन वेंडिंग कमेटी द्वारा निर्धारित समय और ज़ोन का पालन करना अनिवार्य है।
2. अगर कोई वेंडर नियमों का उल्लंघन करता है तो क्या होगा?
MCD को ऐसे वेंडर्स को हटाने का अधिकार है जो निर्धारित शर्तों का पालन करने में विफल रहते हैं।