दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक जनहित याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें आरोप लगाया गया था कि विशेष गहन संशोधन (SIR) के दौरान बेघर लोगों को मतदाता सूची से बाहर रखा जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मौजूदा तंत्र में बेघर लोगों के पंजीकरण के लिए पर्याप्त प्रावधान मौजूद हैं।
- दिल्ली उच्च न्यायालय ने बेघर लोगों के मताधिकार को लेकर दायर PIL को खारिज किया।
- अदालत ने कहा कि मौजूदा मतदाता प्रणाली में बेघर लोगों के नामांकन के लिए कोई 'शून्य' नहीं है।
- निर्वाचन आयोग (ECI) पहले से ही '0' हाउस नंबर के साथ बेघर लोगों को सूची में शामिल कर रहा है।
- विस्थापन के मामले में मतदाता 'फॉर्म 6' के माध्यम से पुन: पंजीकरण करा सकते हैं।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया है, जिसमें दावा किया गया था कि चुनाव आयोग के विशेष गहन संशोधन (SIR) के दौरान राजधानी के बेघर लोगों को मतदाता सूची से बाहर होने का खतरा है। न्यायमूर्ति डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने याचिकाकर्ता इन्दु प्रकाश सिंह की आशंकाओं को निराधार बताते हुए कहा कि चुनावी प्रणाली में बेघर लोगों को शामिल करने के लिए पहले से ही मजबूत प्रावधान मौजूद हैं।
अदालत ने याचिका में लगाए गए आरोपों को 'अपुष्ट' (bald averments) करार दिया। न्यायालय ने टिप्पणी की कि याचिकाकर्ता ने दिल्ली में पिछले वर्षों में चलाए गए ध्वस्तीकरण अभियानों के कारण विस्थापित हुए लोगों के बाहर किए जाने के संबंध में केवल अनुमान लगाए हैं, बिना किसी ठोस साक्ष्य के।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला लोकतंत्र में समावेशिता और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के बीच संतुलन को दर्शाता है। यदि बेघर आबादी को मतदाता सूची से बाहर रखा जाता है, तो यह उनके संवैधानिक मताधिकार का उल्लंघन हो सकता है। हालांकि, अदालत का यह फैसला प्रशासनिक तंत्र की मौजूदा क्षमता पर भरोसा जताता है।
मौजूदा चुनावी तंत्र में बेघर लोगों के लिए कोई रिक्त स्थान नहीं है; प्रक्रिया पहले से ही समावेशी है।
अदालत ने पाया कि ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल के अंश स्पष्ट रूप से बेघर व्यक्तियों की श्रेणी को उनके नाम, आयु, लिंग और फोटोग्राफ के साथ दिखाते हैं, जिसमें घर का नंबर '0' दर्ज किया जाता है। यह दर्शाता है कि भारत निर्वाचन आयोग (ECI) पहले से ही मैनुअल के अनुसार प्रक्रिया का पालन कर रहा है।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति का नाम ध्वस्तीकरण या विस्थापन के कारण मतदाता सूची से हट गया है, तो वह पंजीकरण निर्वाचक नियम, 1960 के तहत 'फॉर्म 6' जमा करके अपना नाम फिर से जुड़वा सकता है। चुनावी मैनुअल के अनुसार, बूथ स्तर अधिकारी (BLO) उस स्थान का सत्यापन करने के लिए व्यक्ति के बताए पते पर जा सकते हैं जहाँ वह व्यक्ति सामान्यतः सोता है।
Historical Background
भारत में मतदाता पंजीकरण की प्रक्रिया दशकों से विकसित हुई है। विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों में, जहाँ ध्वस्तीकरण और अनधिकृत बस्तियों का मुद्दा संवेदनशील है, निर्वाचन आयोग ने हमेशा यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि 'स्थायी पता' न होने के बावजूद नागरिक अपने वोट देने के अधिकार से वंचित न रहें।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: यदि मेरा घर ढहा दिया गया है, तो मैं अपना नाम मतदाता सूची में कैसे वापस ला सकता हूँ?
उत्तर: आप पंजीकरण निर्वाचक नियम, 1960 के तहत 'फॉर्म 6' भरकर अपना नाम फिर से दर्ज करा सकते हैं।
प्रश्न 2: क्या बेघर होने पर भी वोट देने का अधिकार मिलता है?
उत्तर: हाँ, चुनाव आयोग के नियमों के तहत बेघर और फुटपाथ पर रहने वाले लोगों के नामांकन के विशेष प्रावधान हैं।