सuntec सिटी प्रोजेक्ट से जुड़े ₹348 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पंजाब पुलिस के साथ टकराव तेज कर दिया है। ED ने हाईकोर्ट में 200 पन्नों का जवाब दाखिल करते हुए पंजाब पुलिस महानिदेशक (DGP) से तत्काल FIR दर्ज करने की मांग की है।
- ₹348 करोड़ के Suntec City प्रोजेक्ट से जुड़ा है मनी लॉन्ड्रिंग घोटाला।
- ED ने हाईकोर्ट में 200 पन्नों का विस्तृत जवाब पेश किया, जिसमें 150 पन्ने व्हाट्सएप चैट के हैं।
- प्रवर्तन निदेशालय ने पंजाब DGP से भ्रष्टाचार में शामिल अधिकारियों पर तुरंत FIR दर्ज करने की तीसरी बार मांग की है।
- हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार से इस 'संस्थागत भ्रष्टाचार' पर कड़ा रुख अपनाने को कहा है।
चंडीगढ़/अमृतसर: भूमि उपयोग परिवर्तन (Change of Land Use) घोटाले में कानूनी लड़ाई अब और भी तेज हो गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में एक विस्तृत 200 पन्नों का जवाब दाखिल किया है। इस जवाब में न केवल घोटाले की गहराई को दर्शाया गया है, बल्कि एजेंसी ने पंजाब पुलिस महानिदेशक (DGP) गौरव यादव को लिखे तीसरे पत्र के माध्यम से भ्रष्टाचार में शामिल निजी व्यक्तियों और वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के खिलाफ तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने की मांग को दोहराया है।
घोटाले की जड़ें और Suntec City प्रोजेक्ट
यह पूरा मामला Suntec City प्रोजेक्ट से जुड़े ₹348 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग घोटाले से संबंधित है। ED की जांच में संकेत मिले हैं कि इस घोटाले में 'बड़े पैमाने पर और संस्थागत भ्रष्टाचार' शामिल है। जांच एजेंसी ने अजय सहगल, नितिन गोहल और सुरेश कुमार बजाज के ठिकानों पर छापेमारी के बाद इस मामले की कड़ियाँ जोड़ी हैं। याचिकाकर्ता अधिवक्ता निखिल सारफ ने आरोप लगाया है कि सरकारी पदों का दुरुपयोग किया गया और टेंडर व प्रशासनिक प्रक्रियाओं में हेरफेर किया गया।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल एक वित्तीय धोखाधड़ी नहीं है, बल्कि यह राज्य के प्रशासनिक ढांचे में व्याप्त भ्रष्टाचार की गहराई को उजागर करता है। यदि उच्च स्तर के अधिकारी इस तरह के घोटालों में शामिल हैं, तो यह राज्य की कानून व्यवस्था और शासन की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
ED ने स्पष्ट किया है कि पुलिस द्वारा दस्तावेजों की स्पष्टता पर सवाल उठाना केवल जांच में देरी करने का एक तरीका है।
ED ने अपने जवाब में पंजाब पुलिस के उस तर्क को खारिज कर दिया है जिसमें कहा गया था कि साझा किए गए दस्तावेज 'पठनीय नहीं' हैं। एजेंसी ने तर्क दिया कि PMLA-2002 की धारा 66(2) के तहत सूचना साझा करना उनका कानूनी दायित्व है, और पुलिस को FIR दर्ज करने के लिए अतिरिक्त प्रमाणों की प्रतीक्षा करने की आवश्यकता नहीं है।
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के एक्टिंग चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की खंडपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पंजाब सरकार से पूछा है कि इस 'संस्थागत भ्रष्टाचार' के खिलाफ सरकार क्या कार्रवाई करने का प्रस्ताव रखती है। अदालत ने ED को भी निर्देश दिया है कि वह DGP को भेजे गए सभी पत्राचार को अदालत के समक्ष पेश करे।
Frequently Asked Questions
1. यह घोटाला किस प्रोजेक्ट से संबंधित है?
यह घोटाला ₹348 करोड़ के Suntec City प्रोजेक्ट और भूमि उपयोग परिवर्तन (CLU) से संबंधित है।
2. ED ने हाईकोर्ट में क्या पेश किया है?
ED ने 200 पन्नों का जवाब पेश किया है, जिसमें भ्रष्टाचार के सबूत के रूप में 150 पन्नों की व्हाट्सएप चैट शामिल है।