दिल्ली हाईकोर्ट ने कनाडा सरकार को पूर्व ओंटारियो अधिकारी संजय मदान के खिलाफ भारत में सिविल रिकवरी सूट दायर करने की अनुमति दे दी है। यह मामला करोड़ों डॉलर के कथित घोटाले और भारत में स्थानांतरित की गई अवैध संपत्ति से जुड़ा है।

  • दिल्ली हाईकोर्ट ने कनाडा के सिविल रिकवरी सूट को हरी झंडी दे दी है।
  • संजय मदान पर कनाडा के सार्वजनिक कार्यक्रमों से करोड़ों डॉलर हड़पने का आरोप है।
  • अदालत ने क्षेत्राधिकार संबंधी आपत्तियों को खारिज कर दिया है।
  • जांच में पाया गया कि घोटाले की राशि भारतीय बैंक खातों में भेजी गई थी।

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में कनाडा सरकार को भारतीय मूल के पूर्व ओंटारियो सरकारी अधिकारी संजय मदान और अन्य के खिलाफ भारत में सिविल रिकवरी सूट (दीवानी वसूली मुकदमा) चलाने की अनुमति दे दी है। इस फैसले से उन प्रयासों का मार्ग प्रशस्त हो गया है, जिनका उद्देश्य भारत में मौजूद बैंक खातों और संपत्तियों में छिपाई गई कथित धोखाधड़ी की राशि का पता लगाना और उसे वापस पाना है।

न्यायमूर्ति विकास महाजन ने मदान द्वारा दायर उस आवेदन को खारिज कर दिया जिसमें मुकदमे को वापस लेने या खारिज करने की मांग की गई थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि कनाडा को उन धन राशियों का पता लगाने और उन्हें वापस पाने के लिए भारतीय अदालतों का दरवाजा खटखटाने का पूरा अधिकार है, जिन्हें कथित तौर पर कनाडा के सार्वजनिक कार्यक्रमों से निकाला गया था और भारत में स्थानांतरित किया गया था।

मामले की पृष्ठभूमि

यह पूरा मामला कनाडा में एक बड़े धोखाधड़ी मामले से जुड़ा है। संजय मदान, जो ओंटारियो के शिक्षा मंत्रालय में कार्यरत थे, ने अप्रैल 2023 में ओंटारियो सुपरियर कोर्ट ऑफ जस्टिस के समक्ष अपना अपराध स्वीकार किया था। उन्होंने स्वीकार किया था कि उन्होंने 2011 से 2020 के बीच अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग किया और सरकारी धन की चोरी में शामिल रहे।

कनाडाई सरकार के अनुसार, यह घोटाला दो मुख्य योजनाओं के माध्यम से चलाया गया था: पहला, कोविड-19 महामारी के दौरान 'सपोर्ट फॉर फैमिलीज़ प्रोग्राम' के माध्यम से धोखाधड़ी, और दूसरा, आईटी कंसल्टिंग अनुबंधों में रिश्वतखोरी का मामला। जांच में पाया गया कि घोटाले की राशि को भारत में विभिन्न बैंक खातों में स्थानांतरित किया गया था।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला अंतरराष्ट्रीय वित्तीय अपराधों और सीमा पार संपत्ति की वसूली के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल कायम करेगा। यह दर्शाता है कि कैसे डिजिटल बैंकिंग के युग में अपराधी धन को विभिन्न देशों में स्थानांतरित करते हैं, लेकिन कानूनी प्रक्रियाएं अब उन्हें ट्रैक करने में सक्षम हो रही हैं।

यह फैसला अंतरराष्ट्रीय सहयोग और भारत की कानूनी प्रणाली में विदेशी दावों की स्वीकार्यता को मजबूत करता है।

अदालत ने क्षेत्राधिकार के मुद्दे पर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की। मदान का तर्क था कि मामला केवल कनाडा में ही लड़ा जाना चाहिए, लेकिन अदालत ने कहा कि चूंकि धोखाधड़ी की राशि दिल्ली में स्थित बैंक खातों में भेजी गई थी, इसलिए दिल्ली हाईकोर्ट को इस मामले की सुनवाई करने का पूर्ण अधिकार है।

Did You Know?: भारत और कनाडा के बीच सीधे कानूनी आदेशों का निष्पादन (Execution) आसान नहीं है क्योंकि कनाडा 'पारस्परिक क्षेत्र' (Reciprocating Territory) की श्रेणी में नहीं आता है, इसलिए भारत में नया मुकदमा करना आवश्यक है।

Frequently Asked Questions

1. संजय मदान पर क्या आरोप हैं?
मदान पर कनाडा के सार्वजनिक कार्यक्रमों से करोड़ों डॉलर की चोरी करने और रिश्वत लेने का आरोप है।

2. दिल्ली हाईकोर्ट ने क्या आदेश दिया है?
कोर्ट ने कनाडा के उस दावे को स्वीकार किया है जिसमें भारत में स्थित संपत्तियों की वसूली की मांग की गई है।