डॉ. बी.आर. अंबेडकर कोनासीमा जिले के थडिकोना गांव के धान किसानों ने सिंचाई ड्रेन की उपेक्षा और खारे पानी के खतरे के कारण लगभग 200 एकड़ में खेती न करने का निर्णय लिया है।
मुख्य बातें
- थडिकोना गांव के किसानों ने 189 एकड़ में 'क्रॉप हॉलिडे' (फसल अवकाश) की घोषणा की है।
- पीकेलेरू सिंचाई ड्रेन में गाद (silt) जमा होने और अतिक्रमण से जल निकासी बाधित हो रही है।
- एक्वाकल्चर तालाबों से खारा पानी धान के खेतों में घुस रहा है, जिससे फसल बर्बाद होने का डर है।
- प्रशासन ने स्थिति का निरीक्षण किया है और सुधार का आश्वासन दिया है।
डॉ. बी.आर. अंबेडकर कोनासीमा जिले के अल्लावरम मंडल के थडिकोना गांव से एक गंभीर संकट सामने आया है। यहां के धान उत्पादक किसानों ने सरकारी तंत्र की लापरवाही के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए लगभग 189 एकड़ भूमि पर इस खरीफ सीजन (2026-27) में खेती न करने का सामूहिक निर्णय लिया है। किसानों का आरोप है कि पीकेलेरू सिंचाई ड्रेन की बदहाली उनके अस्तित्व के लिए खतरा बन गई है।
अतिक्रमण और गाद का संकट
किसानों के अनुसार, पीकेलेरू ड्रेन में अत्यधिक गाद जमा होने और अवैध अतिक्रमण के कारण पानी का प्रवाह रुक गया है। इसके परिणामस्वरूप, खेतों में जलभराव की समस्या बढ़ गई है। इसके साथ ही, आसपास के एक्वाकल्चर (मछली पालन) तालाबों से खारा पानी धान के खेतों में प्रवेश कर रहा है, जो मिट्टी की उर्वरता को स्थायी रूप से नष्ट कर सकता है। किसानों ने विरोध स्वरूप अपने खेतों में फ्लेक्स बैनर लगाकर सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
BozokMedia विश्लेषण: क्यों महत्वपूर्ण है यह मुद्दा?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल एक स्थानीय समस्या नहीं है, बल्कि यह कृषि और एक्वाकल्चर के बीच बढ़ते असंतुलन का प्रतीक है। यदि सिंचाई ड्रेन का समय पर रखरखाव नहीं किया गया, तो यह क्षेत्र की खाद्य सुरक्षा और किसानों की आजीविका को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।
सिंचाई ड्रेन का प्रबंधन और खारे पानी का नियंत्रण कृषि प्रधान क्षेत्रों के लिए जीवन रेखा के समान है।
जिला कलेक्टर आर. महेश कुमार के निर्देश पर कृषि, एक्वाकल्चर, जल संसाधन और राजस्व विभागों की एक संयुक्त टीम ने गांव का दौरा किया। अधिकारियों ने पाया कि ड्रेन में गाद जमा होने से खेतों में पानी भर रहा है और तालाबों से रिसाव हो रहा है। जिला कृषि अधिकारी एम.वी. रामा राव ने आश्वासन दिया है कि ड्रेन की सफाई और चौड़ीकरण के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
कोनासीमा क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से आंध्र प्रदेश का 'चावल का कटोरा' रहा है। यहां की उपजाऊ भूमि और जल संसाधन कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, लेकिन हाल के वर्षों में अनियंत्रित एक्वाकल्चर विस्तार ने पारंपरिक खेती के लिए चुनौतियां पैदा की हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. किसान किस बात से नाराज हैं?
किसान पीकेलेरू ड्रेन के रखरखाव में कमी, अतिक्रमण और खारे पानी के प्रवेश से नाराज हैं।
2. प्रशासन का क्या रुख है?
प्रशासन ने स्थिति का निरीक्षण किया है और ड्रेन की सफाई व सुधार का आश्वासन दिया है।