कवयित्री अनुपमा राजू और भरतनाट्यम नृत्यांगना राजश्री वारियर अपनी विशेष कलात्मक प्रस्तुति 'NINE — Our Circle of Lines' के माध्यम से नवरसों की व्याख्या कर रहे हैं। यह अनूठा प्रदर्शन बेंगलुरु पोएट्री फेस्टिवल में होने जा रहा है।
मुख्य बातें
- 'NINE — Our Circle of Lines' कविता और नृत्य का एक अभिनव मिश्रण है।
- यह प्रस्तुति बेंगलुरु पोएट्री फेस्टिवल में 1 अगस्त को प्रदर्शित की जाएगी।
- अनुपमा राजू की कविताएँ और राजश्री वारियर के नृत्य की मुद्राएँ एक संवाद की तरह काम करती हैं।
- कलाकार पारंपरिक भरतनाट्यम की सीमाओं को तोड़कर नए प्रयोग कर रहे हैं।
भारतीय शास्त्रीय कलाओं के क्षेत्र में एक नया अध्याय जोड़ते हुए, प्रसिद्ध कवयित्री अनुपमा राजू और दिग्गज भरतनाट्यम नृत्यांगना राजश्री वारियर अपनी सहयोगी प्रस्तुति 'NINE — Our Circle of Lines' के माध्यम से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करने के लिए तैयार हैं। यह कलात्मक मिलन भरतमुनि के 'नाट्यशास्त्र' में वर्णित नौ रसों (नवरस) को एक नए और आधुनिक दृष्टिकोण से प्रस्तुत करता है।
यह प्रस्तुति केवल प्रदर्शन नहीं, बल्कि शब्दों और मुद्राओं के बीच एक जीवंत संवाद है। जहाँ अनुपमा राजू अपनी कविताओं के माध्यम से भावनाओं को शब्द देती हैं, वहीं राजश्री वारियर उन शब्दों को नृत्य की गतिशीलता से जीवंत करती हैं। इस सहयोग की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह पारंपरिक भरतनाट्यम के ढांचे को तोड़कर उसे एक नई भाषा के रूप में उपयोग करता है।
क्यों खास है यह प्रस्तुति?
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह कलाकृति पारंपरिक सीमाओं को चुनौती देती है। राजश्री वारियर ने केवल नृत्य ही नहीं किया, बल्कि इस प्रस्तुति के लिए संगीत भी तैयार किया है, जिसमें वायलिन, मृदंगम, हारप और मिज़हवु जैसे वाद्ययंत्रों का सुंदर समावेश है। यह प्रस्तुति शृंगार, बीभत्स और भय जैसे जटिल रसों पर केंद्रित है, जो दर्शकों को भावनाओं की गहरी परतों में ले जाती है।
"यह मेरे लिए शब्दों और आंदोलनों के बीच एक निरंतर संवाद की तरह है," अनुपमा राजू ने अपनी कलात्मक यात्रा साझा करते हुए कहा।
कलाकारों ने बताया कि इस परियोजना पर काम करने की प्रेरणा उन्हें महामारी के दौरान मिली। उन्होंने एक ऐसी कलाकृति बनाने का लक्ष्य रखा जिसे साहित्यिक प्रेमी और कला के पारखी गहराई से समझ सकें। बेंगलुरु पोएट्री फेस्टिवल में इस प्रस्तुति का मंचन दर्शकों के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव होने वाला है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भरतमुनि का नाट्यशास्त्र भारतीय कला का आधार स्तंभ है, जिसमें नौ रसों का वर्णन है। सदियों से इन रसों को पारंपरिक तरीकों से ही दर्शाया जाता रहा है, लेकिन 'NINE' जैसी आधुनिक प्रस्तुतियाँ इन प्राचीन भावनाओं को समकालीन संदर्भों में ढालने का प्रयास कर रही हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: यह प्रस्तुति कब और कहाँ होगी?
उत्तर: यह प्रस्तुति 1 अगस्त को बेंगलुरु पोएट्री फेस्टिवल में आयोजित की जाएगी।
प्रश्न 2: इस कलात्मक मेल में कौन-कौन से वाद्ययंत्रों का प्रयोग किया गया है?
उत्तर: इसमें वायलिन, मृदंगम, हारप, मिज़हवु और गायन का उपयोग किया गया है।