1975 की एक ऐतिहासिक रिपोर्ट से पता चला है कि काबिनी जलाशय और अतिक्रमण ने दक्षिण भारत में हाथियों के महत्वपूर्ण प्रवास मार्गों को पूरी तरह से काट दिया है। यह खोज वन्यजीव संरक्षण के लिए एक गंभीर चेतावनी है।
मुख्य बातें
- काबिनी जलाशय ने हाथियों के प्राकृतिक आवास को दो भागों में विभाजित कर दिया है।
- पारंपरिक प्रवास मार्ग अब लगभग पूरी तरह से बंद हो चुके हैं।
- बेंगलुरु से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार, जवाहर नेशनल पार्क के संरक्षण की तत्काल आवश्यकता है।
बेंगलुरु: दक्षिण भारत में हाथियों के पारंपरिक आवास को बचाने की तत्काल आवश्यकता पर एक पारिस्थितिक टोली (ecological reconnaissance party) ने अपनी रिपोर्ट में जोर दिया है। 1975 के मानसून के दौरान की गई एक विस्तृत पैदल यात्रा और मैपिंग से यह स्पष्ट हुआ है कि मानव निर्मित संरचनाओं ने वन्यजीवों के जीवन को कैसे प्रभावित किया है।
रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित जवाहर नेशनल पार्क, जो कर्नाटक के बांदीपुर और नागरहोल, तमिलनाडु के मुदुमलई और केरल के वायनाड को मिलाकर 2,000 वर्ग किमी में फैला है, वर्तमान में गंभीर खतरों का सामना कर रहा है। इस क्षेत्र का अध्ययन करने वाली टीम ने पाया कि वन्यजीवों के घनत्व को समझने के लिए किए गए जमीनी सर्वेक्षण में पारिस्थितिक असंतुलन के गहरे संकेत मिले हैं।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि काबिनी जलाशय और केरल के पुलपुल्ली के जंगलों में बढ़ते अतिक्रमण ने वन्यजीव आवास के क्षेत्र को नाटकीय रूप से कम कर दिया है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इन बाधाओं ने हाथियों के पारंपरिक प्रवास मार्गों को लगभग पूरी तरह से विभाजित कर दिया है, जिससे हाथियों का एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में जाना असंभव हो गया है।
वन्यजीव आवासों का विखंडन हाथियों की उत्तरजीविता और उनकी आनुवंशिक विविधता के लिए एक अस्तित्वगत खतरा पैदा करता है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: यह मामला 1975-76 के दौर का है जब भारत में बड़े बांधों और विकास परियोजनाओं के कारण वन्यजीव गलियारों (wildlife corridors) के कटने की समस्या पहली बार प्रमुखता से उभरी थी। यह रिपोर्ट आज भी प्रासंगिक है क्योंकि आवास विखंडन आज भी मानव-हाथी संघर्ष का मुख्य कारण बना हुआ है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. काबिनी परियोजना का हाथियों पर क्या प्रभाव पड़ा?
काबिनी जलाशय ने हाथियों के प्राकृतिक आवास को दो हिस्सों में बांट दिया और उनके पारंपरिक प्रवास मार्गों को अवरुद्ध कर दिया।
2. प्रस्तावित जवाहर नेशनल पार्क में कौन से क्षेत्र शामिल हैं?
इसमें बांदीपुर, नागरहोल, मुदुमलई और वायनाड के वन क्षेत्र शामिल हैं।