मुंबई के अनाथालयों से गोद ली गई दो भारतीय महिलाओं ने डीएनए परीक्षण के माध्यम से खोजा कि वे केवल सहेलियां नहीं, बल्कि सगी बहनें हैं। दशकों बाद हुआ यह भावनात्मक मिलन किसी फिल्मी कहानी जैसा है।
- मीना गेलटिंक और मीनल तिजेसन 1980 के दशक में मुंबई से गोद ली गई थीं।
- वे दशकों तक नीदरलैंड में सहेलियों के रूप में पली-बढ़ीं।
- डीएनए परीक्षण ने पुष्टि की कि वे 100% सगी बहनें हैं।
- दोनों का जन्म एक ही माता-पिता से हुआ था।
यह कहानी किसी बॉलीवुड फिल्म की पटकथा जैसी लगती है। नीदरलैंड में रहने वाली दो भारतीय मूल की महिलाएं, जो 40 के दशक में हैं, जिन्हें अलग-अलग परिवारों ने बचपन में गोद लिया था, उन्हें अब पता चला है कि वे वास्तव में सगी बहनें हैं। मीना गेलटिंक और मीनल तिजेसन, जिनका जन्म 1980 के दशक की शुरुआत में हुआ था, उन्हें मुंबई के दो अलग-अलग अनाथालयों से कुछ ही महीनों के अंतराल में गोद लिया गया था।
जब वे अपनी किशोरावस्था में पहली बार एक एडाप्शन एजेंसी द्वारा आयोजित कार्यक्रम में मिली थीं, तो वे एक-दूसरे के लुक्स और हाव-भाव में अद्भुत समानता देखकर दंग रह गई थीं। मीना, जो अब 43 वर्ष की हैं, उस दिन को स्पष्ट रूप से याद करती हैं। उन्होंने बताया कि कैसे उनके दोस्तों ने भी उनकी समानता को नोटिस किया था। उस समय, उनके बीच कोई खून का रिश्ता होने का संकेत नहीं था, लेकिन उनके बीच एक गहरा जुड़ाव था। उन्होंने सालों तक एक-दूसरे को पत्र लिखे और अक्सर एक-दूसरे को 'सिस्टर' कहकर संबोधित किया क्योंकि वे वैसा ही महसूस करती थीं।
क्यों यह खबर महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि यह घटना न केवल व्यक्तिगत पहचान की खोज को रेखांकित करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि कैसे आधुनिक डीएनए तकनीक उन पारिवारिक कड़ियों को जोड़ सकती है जो दशकों से टूटी हुई थीं। यह उन हजारों बच्चों के लिए एक उम्मीद की किरण है जो अपनी जड़ों की तलाश में हैं।
'यह डीएनए मिलान हमारी अंतरात्मा की पुष्टि थी कि हम हमेशा से बहनें ही थे।'
लगभग 15 साल तक संपर्क टूटने के बाद, 2024 में सोशल मीडिया और डीएनए परीक्षण के माध्यम से यह चमत्कार हुआ। मीना ने जब डीएनए ऐप पर लॉग इन किया, तो परिणाम स्पष्ट थे—वे 'फुल सिस्टर्स' थीं, जिसका अर्थ है कि उनके माता-पिता एक ही थे। अगस्त में हुई उनकी मुलाकात बेहद भावुक थी, जिसमें आंसू, गले मिलना और हंसी शामिल थी।
ऐतिहासिक संदर्भ: भारत में गोद लेने की प्रक्रिया
1980 के दशक में, भारत में अंतरराष्ट्रीय गोद लेने की प्रक्रिया आज की तुलना में काफी अलग और अक्सर कम पारदर्शी थी। कई मामलों में, अनाथालयों के रिकॉर्ड का पूर्ण विवरण नहीं दिया जाता था, जिससे जैविक माता-पिता की पहचान करना लगभग असंभव हो जाता था। मीना ने 2003 में मुंबई के उस अनाथालय का दौरा भी किया था, लेकिन उन्हें कोई जानकारी नहीं मिल सकी थी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. मीना और मीनल को कहाँ से गोद लिया गया था?
उन्हें मुंबई, भारत के दो अलग-अलग अनाथालयों से गोद लिया गया था।
2. उन्हें कैसे पता चला कि वे बहनें हैं?
एक डीएनए परीक्षण के माध्यम से, जिसने पुष्टि की कि वे 100% जैविक बहनें हैं।