चेन्नई के ममल्लन जलाशय निर्माण कार्य में बड़ी प्रशासनिक चूक सामने आई है। जल संसाधन विभाग (WRD) ने काम शुरू होने के छह महीने बाद मत्स्य विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) की मांग की है।
मुख्य बातें
- ममल्लन जलाशय परियोजना की लागत ₹342.60 करोड़ है।
- निर्माण कार्य शुरू होने के छह महीने बाद WRD ने मत्स्य विभाग से NOC मांगी है।
- स्थानीय मछुआरा समुदाय इस परियोजना का कड़ा विरोध कर रहा है।
- CRZ मंजूरी के तहत मत्स्य विभाग की अनुमति अनिवार्य थी।
चेन्नई के नेम्मली में निर्माणाधीन ममल्लन जलाशय परियोजना को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक विवाद खड़ा हो गया है। जल संसाधन विभाग (WRD) ने परियोजना के निर्माण कार्य शुरू होने के लगभग छह महीने बाद अब मत्स्य और मछुआरा कल्याण विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) के लिए आवेदन किया है। यह कदम तटीय विनियमन क्षेत्र (CRZ) की अनिवार्य शर्तों के उल्लंघन की ओर इशारा करता है।
गौरतलब है कि तमिलनाडु राज्य तटीय क्षेत्र प्रबंधन प्राधिकरण (TNSCZMA) ने 3 दिसंबर, 2025 को इस जलाशय के लिए CRZ मंजूरी दी थी। इस मंजूरी में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि पीने के पानी के जलाशय के रूप में कोवलम सब-बेसिन के विकास के लिए मत्स्य विभाग से एनओसी लेना आवश्यक है। तत्कालीन मुख्यमंत्री ने 19 जनवरी, 2026 को इस ₹342.60 करोड़ की महत्वाकांक्षी परियोजना की आधारशिला रखी थी।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि इस तरह की प्रक्रियात्मक देरी न केवल सरकारी धन की बर्बादी करती है, बल्कि कानूनी जटिलताओं को भी जन्म देती है। यदि परियोजना के लिए आवश्यक मंजूरी निर्माण शुरू होने के बाद मांगी जा रही है, तो यह भविष्य में अदालती हस्तक्षेप और काम रुकने का बड़ा कारण बन सकती है।
प्रशासनिक नियमों की अनदेखी से न केवल पर्यावरण को खतरा है, बल्कि स्थानीय आजीविका भी दांव पर लग जाती है।
स्थानीय मछुआरा समुदायों ने इस परियोजना का कड़ा विरोध किया है। उनका तर्क है कि कोवलम-नेम्मली बैकवाटर्स और नमक के दलदल (salt marsh) को मीठे पानी के जलाशय में बदलने से मछली प्रजनन स्थलों और उनके पारंपरिक मछली पकड़ने के क्षेत्रों को अपूरणीय क्षति होगी।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
कोवलम उप-बेसिन क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से एक समृद्ध तटीय पारिस्थितिकी तंत्र रहा है। 2018 के एक सरकारी तटीय जलमग्नता मानचित्र (inundation map) के अनुसार, जलाशय का एक बड़ा हिस्सा अत्यधिक समुद्री स्थितियों के दौरान बाढ़ के प्रति संवेदनशील क्षेत्र में आता है, जो इस परियोजना की सुरक्षा पर सवाल उठाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. ममल्लन जलाशय परियोजना की कुल लागत क्या है?
इस परियोजना की कुल अनुमानित लागत ₹342.60 करोड़ है।
2. मछुआरे इस परियोजना का विरोध क्यों कर रहे हैं?
मछुआरे इस बात से चिंतित हैं कि जलाशय बनने से उनके मछली पकड़ने के क्षेत्र और मछली प्रजनन के प्राकृतिक आवास नष्ट हो जाएंगे।