दक्षिण कन्नड़ के सांसद कैप्टन बृजेश चोता के निरंतर प्रयासों के बाद, रेल मंत्रालय ने मंगलुरु रेलवे क्षेत्र को दक्षिण पश्चिमी रेलवे (SWR) के तहत लाने की मंजूरी दे दी है।

  • मंगलुरु रेलवे क्षेत्र अब 1 अक्टूबर से SWR के मैसूरु डिवीजन के अधीन होगा।
  • यह निर्णय प्रशासनिक स्पष्टता और बेहतर बुनियादी ढांचे के विकास में मदद करेगा।
  • सांसद कैप्टन बृजेश चोता ने जून 2024 से इस मांग के लिए निरंतर संघर्ष किया।

दक्षिण कन्नड़ के सांसद कैप्टन बृजेश चोता ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि उनके निरंतर प्रयासों के परिणामस्वरूप रेल मंत्रालय ने मंगलुरु रेलवे क्षेत्र को एक एकल प्रशासनिक क्षेत्राधिकार—दक्षिण पश्चिमी रेलवे (SWR)—के तहत लाने की लंबी लंबित मांग को स्वीकार कर लिया है।

इस ऐतिहासिक निर्णय के अनुसार, उल्लाल सहित मंगलुरु क्षेत्र को 1 अक्टूबर से दक्षिणी रेलवे (SR) के पलक्कड़ डिवीजन से स्थानांतरित कर SWR के मैसूरु डिवीजन में शामिल कर लिया जाएगा। इस बदलाव से मंगलुरु में होने वाली प्रशासनिक और क्षेत्राधिकार संबंधी बाधाएं दूर होंगी, जिससे यात्रियों की समस्याओं का तेजी से समाधान और रेलवे बुनियादी ढांचे का विकास सुगम होगा।

प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण और विकास

वर्तमान में, मंगलुरु क्षेत्र विभिन्न रेलवे क्षेत्राधिकारों के बीच बंटा हुआ था, जिससे बुनियादी ढांचे और परिचालन संबंधी मुद्दों को सुलझाना एक जटिल कार्य था। BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि इस एकीकरण से तटीय कर्नाटक में रेलवे कनेक्टिविटी और परिचालन समन्वय में क्रांतिकारी सुधार आएगा।

इस निर्णय के साथ, हम अपनी रेलवे संबंधी चिंताओं को दूर करने और यह सुनिश्चित करने के लिए बेहतर स्थिति में होंगे कि मंगलुरु की रेलवे 'विकास' के पथ पर तेजी से आगे बढ़े।

कैप्टन चोता ने बताया कि उन्होंने जून 2024 में पदभार ग्रहण करने के तुरंत बाद से इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। उन्होंने रेल राज्य मंत्री वी. सोमन्ना और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के साथ कई उच्च स्तरीय बैठकों में इस पुनर्गठन की वकालत की थी।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

मंगलुरु का रेलवे नेटवर्क लंबे समय से प्रशासनिक विखंडन का सामना कर रहा था। विभिन्न स्टेशनों का अलग-अलग डिवीजनों के अधीन होना विकास कार्यों में देरी का मुख्य कारण था। इस पुनर्गठन के माध्यम से, रेलवे बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि SWR-SR इंटरचेंज पॉइंट अब पडिल से बदलकर उल्लाल हो जाएगा।

विशेषतापुरानी व्यवस्थानई व्यवस्था (1 अक्टूबर से)
प्रशासनिक नियंत्रणदक्षिणी रेलवे (पलक्कड़ डिवीजन)दक्षिण पश्चिमी रेलवे (मैसूरु डिवीजन)
इंटरचेंज पॉइंटपडिलउल्लाल
प्रशासनिक स्पष्टताकम (विखंडित)उच्च (एकीकृत)
Did You Know?: मंगलुरु का रेलवे नेटवर्क कोंकण रेलवे और दक्षिण पश्चिमी रेलवे के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करता है।

Frequently Asked Questions

1. मंगलुरु रेलवे क्षेत्र कब से SWR के अधीन होगा?
यह परिवर्तन 1 अक्टूबर से प्रभावी होगा।

2. इस बदलाव का मुख्य लाभ क्या है?
इससे प्रशासनिक स्पष्टता बढ़ेगी और रेलवे बुनियादी ढांचे का विकास तेजी से होगा।