असम में बाढ़ से जुड़ी मौतों का आंकड़ा बढ़कर 66 हो गया है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने राहत कार्यों के लिए भाजपा कार्यकर्ताओं से ₹12 करोड़ जुटाने की अपील की है, जबकि कांग्रेस ने सरकार पर विफलता का आरोप लगाया है।

मुख्य बातें

  • असम में बाढ़ से अब तक 66 लोगों की जान जा चुकी है।
  • मुख्यमंत्री ने 4 लाख महिलाओं और बच्चों के लिए कपड़ों के वितरण की घोषणा की है।
  • भाजपा ने राहत कोष के लिए कार्यकर्ताओं से ₹12 करोड़ जुटाने का आह्वान किया है।
  • कांग्रेस ने सरकार की राहत तैयारियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

असम में मानसून की भारी बारिश और नदियों के उफान ने तबाही मचा दी है। शनिवार रात तक आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, बाढ़ से जुड़ी मौतों की संख्या बढ़कर 66 हो गई है। राज्य के कई जिले, विशेष रूप से पूर्वी असम के चराइदेओ, जोरहाट और शिवसागर, सबसे अधिक प्रभावित हैं, जहां लगभग 94% पीड़ित निवास करते हैं।

मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने आपदा की इस घड़ी में राहत कार्यों को तेज करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने घोषणा की है कि शिवसागर, चराइदेओ, जोरहाट और गोलाघाट के 4 लाख महिलाओं और बच्चों को कपड़े वितरित किए जाएंगे। इसके लिए उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं से ₹12 करोड़ की सहायता राशि जुटाने की अपील की है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है कि ₹2,000 तक का दान स्थानीय विधायक को दिया जा सकता है, जबकि इससे अधिक की राशि सीधे भाजपा असम के बैंक खाते में जमा की जानी चाहिए।

क्यों महत्वपूर्ण है यह खबर?

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, असम की भौगोलिक स्थिति इसे हर साल मानसून के दौरान अत्यधिक संवेदनशील बनाती है। वर्तमान संकट न केवल बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था को भी गंभीर चोट पहुंचा रहा है। सरकार द्वारा राजनीतिक दलों के माध्यम से धन जुटाने का निर्णय इस आपदा की व्यापकता और सरकारी संसाधनों पर बढ़ते दबाव को दर्शाता है।

असम में बाढ़ का प्रबंधन अब केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि एक सामाजिक और राजनीतिक चुनौती बन गया है।

राजनीतिक गलियारों में भी इस संकट को लेकर खींचतान जारी है। असम कांग्रेस के अध्यक्ष और जोरहाट के सांसद गौरव गोगोई ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार बाढ़ पीड़ितों की मदद करने में पूरी तरह विफल रही है। उन्होंने मांग की कि सरकार राजनीतिक हितों के बजाय राहत और पुनर्वास को प्राथमिकता दे। दूसरी ओर, एआईयूडीएफ (AIUDF) के अध्यक्ष मोहम्मद बदरुद्दीन अजमल ने व्यक्तिगत रूप से ₹2 करोड़ के योगदान की घोषणा की है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

असम के ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियां दशकों से विनाशकारी बाढ़ का कारण रही हैं। हर साल लाखों लोग विस्थापित होते हैं और कृषि क्षेत्र को भारी नुकसान होता है। पिछले कुछ वर्षों में, जलवायु परिवर्तन के कारण बाढ़ की तीव्रता और अवधि में वृद्धि देखी गई है, जिससे राज्य के लिए यह एक स्थायी चुनौती बन गया है।

क्या आप जानते हैं?: असम में बाढ़ का प्रभाव अक्सर नागालैंड की सीमा से लगे जिलों में सबसे अधिक होता है, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों में मानवीय सहायता पहुंचाना और भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. मुख्यमंत्री ने राहत के लिए क्या घोषणा की है?
मुख्यमंत्री ने 4 लाख महिलाओं और बच्चों को कपड़े बांटने और किसानों को मुफ्त बीज उपलब्ध कराने की घोषणा की है।

2. भाजपा कार्यकर्ताओं से कितनी राशि मांगी गई है?
मुख्यमंत्री ने राहत कार्यों के लिए भाजपा कार्यकर्ताओं से ₹12 करोड़ जुटाने की अपील की है।