असम में आई विनाशकारी बाढ़ के बीच सोशल मीडिया पर राहत राशि मांगने वाले कई संदिग्ध खातों का खुलासा हुआ है। इंडिया टुडे की OSINT जांच में पाया गया कि जांचे गए 40 में से 35 इंस्टाग्राम अकाउंट्स में धोखाधड़ी के गंभीर संकेत मिले हैं।

मुख्य बातें

  • इंडिया टुडे की जांच में 40 में से 35 इंस्टाग्राम अकाउंट्स संदिग्ध पाए गए।
  • अधिकांश अकाउंट्स व्यक्तिगत UPI आईडी पर पैसे मांग रहे हैं, न कि रजिस्टर्ड संस्थाओं के।
  • कुछ अकाउंट्स पुराने या गलत वीडियो का उपयोग करके फर्जी राहत कार्य दिखा रहे हैं।

असम में आई विनाशकारी बाढ़ की हृदयविदारक तस्वीरों ने सोशल मीडिया पर लोगों को भावुक कर दिया है, जिससे मदद करने की एक तीव्र इच्छा पैदा हुई है। लेकिन इसी सहानुभूति का फायदा उठाने के लिए जालसाजों ने अपना जाल फैलाना शुरू कर दिया है। इंडिया टुडे की ओपन सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT) टीम ने असम बाढ़ के नाम पर चंदा मांग रहे 40 इंस्टाग्राम अकाउंट्स का गहन विश्लेषण किया है।

जांच के परिणामों ने चौंकाने वाले तथ्य उजागर किए हैं। विश्लेषण के अनुसार, लगभग 90% खातों में धोखाधड़ी या अत्यधिक संदिग्ध व्यवहार के लक्षण पाए गए। इंडिया टुडे ने एक त्रि-स्तरीय जोखिम ढांचा तैयार किया था, जिसमें प्रोफाइल की उम्र, संस्था का पंजीकरण और भुगतान विवरणों की जांच की गई। 40 में से 35 खातों ने इन तीनों ही पैमानों पर फेल होकर रेड फ्लैग (चेतावनी) दिखाए हैं।

यह क्यों मायने रखता है

BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि आपदा के समय डिजिटल धोखाधड़ी का एक नया पैटर्न उभर रहा है। जब लोग संकट में फंसे लोगों की मदद करना चाहते हैं, तो वे अक्सर बिना जांचे-परखे दान कर देते हैं। ऐसे में, फर्जी प्रोफाइल द्वारा व्यक्तिगत UPI आईडी का उपयोग करना और बिना किसी संस्थागत पहचान के पैसे मांगना सीधे तौर पर लोगों की संवेदनाओं के साथ खिलवाड़ है।

आपदा के समय सहानुभूति का लाभ उठाकर धन उगाही करना न केवल अनैतिक है, बल्कि यह वास्तविक पीड़ितों की मदद में भी बड़ी बाधा है।

जांच में यह भी पाया गया कि कुछ प्रोफाइल अपनी विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए पुराने वीडियो का सहारा ले रहे हैं। एक मामले में, जंतर-मंतर पर हुए भोजन वितरण के वीडियो को असम बाढ़ राहत के रूप में पेश किया गया था। इसके अलावा, कई अकाउंट्स केवल जुलाई 2026 में बनाए गए थे और उनके पास कोई डिजिटल इतिहास नहीं था।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

असम का लगभग 40% हिस्सा बाढ़ की चपेट में रहने वाला क्षेत्र है। ब्रह्मपुत्र नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण राज्य को हर साल भारी तबाही का सामना करना पड़ता है। इस वर्ष की बाढ़ ने पिछले कई वर्षों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं, जिससे भोजन, आश्रय और पुनर्निर्माण के लिए धन की भारी आवश्यकता है।

क्या आप जानते हैं?: जालसाज अक्सर 'रिवर्स वीडियो सर्च' के माध्यम से पकड़े जा सकते हैं, क्योंकि वे पुराने वीडियो का उपयोग करके अपनी फर्जी पहचान बनाते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. मैं कैसे सुनिश्चित करूँ कि मेरा दान सही जगह जा रहा है?
हमेशा रजिस्टर्ड एनजीओ या सरकारी राहत कोष को ही दान दें और व्यक्तिगत UPI आईडी से बचें।

2. क्या सोशल मीडिया पर दिखने वाले सभी राहत वीडियो असली होते हैं?
नहीं, कई बार पुराने या दूसरे स्थानों के वीडियो को असम बाढ़ का बताकर साझा किया जाता है।