नागनूर रुद्रक्षी मठ के श्री अल्लम प्रभु स्वामी ने बेलगावी में पत्रकारों को चेतावनी दी है कि वे बदलते डिजिटल युग में प्रासंगिक बने रहने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की तकनीक अपनाएं। उन्होंने पत्रकारों के लिए सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा की भी मांग की है।
मुख्य बातें
- पत्रकारों को उभरती तकनीकों और AI के साथ तालमेल बिठाने के लिए नए कौशल सीखने होंगे।
- डिजिटल मीडिया के उदय के साथ AI एंकरों का चलन बढ़ रहा है।
- स्वतंत्र पत्रकारों के लिए सरकार को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करनी चाहिए।
- फेक न्यूज के दौर में जिम्मेदारी और संयम के साथ रिपोर्टिंग करना अनिवार्य है।
बेलगावी में कर्नाटक पत्रकारों संघ द्वारा आयोजित 'मीडिया दिवस' समारोह के दौरान, नागनूर रुद्रक्षी मठ के श्री अल्लम प्रभु स्वामी ने पत्रकारिता के बदलते स्वरूप पर महत्वपूर्ण विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि डिजिटल मीडिया के विस्तार ने पत्रकारिता के पारंपरिक ढांचे को बदल दिया है, जिससे पत्रकारों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।
स्वामी ने विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज के समय में टीवी चैनलों और डिजिटल पोर्टल्स पर AI एंकर खबरें पढ़ रहे हैं। ऐसे में पत्रकारों के मन में यह डर होना स्वाभाविक है कि भविष्य में उनकी आवश्यकता कम हो सकती है। उन्होंने सुझाव दिया कि इस डर से लड़ने का एकमात्र तरीका यह है कि पत्रकार समय के साथ अपनी स्किल्स को अपडेट करें और नई तकनीक के साथ खुद को ढालें।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि मीडिया उद्योग एक बड़े संक्रमण काल से गुजर रहा है। यदि पत्रकार एआई टूल्स का उपयोग डेटा विश्लेषण, स्क्रिप्टिंग और रिसर्च के लिए करना सीख जाते हैं, तो वे अपनी दक्षता बढ़ा सकते हैं। तकनीक को दुश्मन मानने के बजाय उसे एक सहयोगी के रूप में देखना ही भविष्य की कुंजी है।
पत्रकारों को उभरती प्रौद्योगिकियों द्वारा पेश की गई चुनौतियों का सामना करने के लिए एआई उपयोग कौशल सीखना चाहिए।
समारोह में कित्तूर रानी चन्नम्मा विश्वविद्यालय के कुलपति सी.एम. त्यागराज ने भी पत्रकारों की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पत्रकारों की जिम्मेदारी सरकार और समाज के कामकाज का आलोचनात्मक विश्लेषण करना है, लेकिन उन्हें सफलता मिलने पर अहंकार से बचना चाहिए और हमेशा सीखने के लिए तत्पर रहना चाहिए।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
पत्रकारिता का इतिहास हमेशा से तकनीक के साथ विकसित हुआ है। प्रिंट मीडिया से रेडियो, टेलीविजन और अब डिजिटल मीडिया तक का सफर तकनीकी नवाचारों का ही परिणाम है। एआई का आगमन इस विकास क्रम का अगला और सबसे क्रांतिकारी चरण माना जा रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. क्या एआई पत्रकारों की जगह ले लेगा?
एआई कुछ कार्यों को स्वचालित कर सकता है, लेकिन मानवीय संवेदना, नैतिकता और गहन विश्लेषण के लिए पत्रकारों की आवश्यकता हमेशा बनी रहेगी।
2. पत्रकारों को किन कौशलों पर ध्यान देना चाहिए?
उन्हें डेटा पत्रकारिता, एआई प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग और डिजिटल कंटेंट मैनेजमेंट जैसे आधुनिक कौशल सीखने चाहिए।