दिल्ली के 40 परिवारों द्वारा शुरू किया गया 'गर्मी खाता' अभियान अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के पास पहुँच गया है, जो भीषण गर्मी के मानवीय और आर्थिक प्रभावों को दर्ज करता है।
मुख्य बातें
- 'गर्मी खाता' पहल के माध्यम से नागरिकों ने गर्मी के स्वास्थ्य और आय पर प्रभाव को दर्ज किया है।
- इस डेटा को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) को साक्ष्य के रूप में सौंपा गया है।
- मांग की गई है कि हीटवेव को राष्ट्रीय आपदा घोषित किया जाए और हीट एक्शन प्लान को फंड दिया जाए।
दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले लगभग 40 परिवारों ने इस साल गर्मी के तीन भीषण महीनों के दौरान एक अभूतपूर्व प्रयोग किया। उन्होंने 'गर्मी खाता' नामक एक हस्तलिखित साप्ताहिक लॉग बनाए, जिसमें उन्होंने दर्ज किया कि अत्यधिक गर्मी ने उनके स्वास्थ्य, दैनिक दिनचर्या और आय पर क्या प्रभाव डाला।
यह केवल एक सर्वेक्षण नहीं था, बल्कि नागरिकों द्वारा स्वयं की पीड़ा का दस्तावेजीकरण था। इस पहल का उद्देश्य गर्मी को केवल एक मौसम संबंधी घटना के रूप में नहीं, बल्कि एक गंभीर मानवाधिकार संकट के रूप में स्थापित करना है। हाल ही में, इस डेटा को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) को औपचारिक रूप से सौंप दिया गया है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि जलवायु परिवर्तन अब केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह सीधे तौर पर आजीविका और जीवन के अधिकार से जुड़ा है। जब गर्मी के कारण मजदूर काम नहीं कर पाते या बीमार पड़ते हैं, तो यह सीधे तौर पर उनकी आर्थिक स्थिति और मौलिक अधिकारों पर प्रहार करता है।
गर्मी अब केवल एक असुविधा नहीं, बल्कि एक ऐसा संकट है जो मानवीय गरिमा और जीवन के अधिकार को चुनौती दे रहा है।
इस अभियान में ग्रीनपीस साउथ एशिया के डिप्टी प्रोग्राम डायरेक्टर अविनाश चंचल और सामाजिक कार्यकर्ता दीपाली टोन्का ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनका तर्क है कि सरकार को गर्मी को राष्ट्रीय आपदा घोषित करना चाहिए और समर्पित हीट एक्शन प्लान के लिए बजट आवंटित करना चाहिए।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत में पिछले कुछ वर्षों में हीटवेव की आवृत्ति और तीव्रता में भारी वृद्धि देखी गई है। शहरी इलाकों में 'हीट आइलैंड' प्रभाव के कारण तापमान और भी घातक हो जाता है, जिससे गरीब और श्रमिक वर्ग सबसे अधिक प्रभावित होते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. 'गर्मी खाता' क्या है?
यह एक नागरिक-आधारित दस्तावेजीकरण पहल है जहाँ लोग गर्मी के प्रभावों को रिकॉर्ड करते हैं।
2. NHRC से क्या मांग की गई है?
गर्मी को मानवाधिकार के रूप में मान्यता देने और हीटवेव को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग की गई है।