भारत में महिलाओं को दिए जाने वाले बिना शर्त नकद हस्तांतरण (UCT) ने एक नई बहस छेड़ दी है। प्रोफेसर प्रभा कोटिसवारन का तर्क है कि ये भुगतान महिलाओं के अदृश्य घरेलू कार्यों को आर्थिक मान्यता देते हैं।
- भारत के 14 से अधिक राज्यों में 12 करोड़ महिलाओं को नकद लाभ मिल रहा है।
- राज्य सरकारें इन योजनाओं पर सालाना 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च कर रही हैं।
- विशेषज्ञों के बीच सामाजिक बुनियादी ढांचे पर इसके वित्तीय प्रभाव को लेकर बहस जारी है।
- प्रोफेसर प्रभा कोटिसवारन के अनुसार, यह 'घरेलू काम के लिए वेतन' का एक रूप है।
भारत में महिलाओं के लिए अनकंडीशनल कैश ट्रांसफर (UCT) या बिना शर्त नकद हस्तांतरण की योजनाएं तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, देश के 14 से अधिक राज्यों ने इस तरह की योजनाएं लागू की हैं, जिससे लगभग 12 करोड़ महिलाएं लाभान्वित हो रही हैं। इन योजनाओं के तहत मासिक भुगतान 833 रुपये से लेकर 2,500 रुपये तक होता है, जिससे राज्य सरकारों पर सालाना 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक का वित्तीय बोझ पड़ रहा है।
हालांकि, इस आर्थिक सहायता के साथ ही एक गंभीर वित्तीय बहस भी शुरू हो गई है। रिपोर्टों के अनुसार, कम से कम छह राज्यों ने 2025-26 के लिए राजस्व घाटे का अनुमान लगाया है। आलोचकों का तर्क है कि महिलाओं पर केंद्रित इन नकद हस्तांतरणों के कारण सार्वजनिक स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक बुनियादी ढांचे के लिए बजट कम हो सकता है।
क्यों यह महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मुद्दा केवल वित्तीय प्रबंधन का नहीं है, बल्कि यह सामाजिक संरचना और लैंगिक भूमिकाओं के पुनर्मूल्यांकन का है। क्या नकद राशि वास्तव में महिलाओं को सशक्त बनाती है, या यह केवल एक अल्पकालिक राहत है जो दीर्घकालिक विकास (जैसे शिक्षा और स्वास्थ्य) को प्रभावित कर सकती है?
नकद हस्तांतरण महिलाओं के अवैतनिक घरेलू और देखभाल कार्यों के लिए एक आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक मान्यता का रूप है।
किंग्स कॉलेज में कानून और सामाजिक न्याय की प्रोफेसर प्रभा कोटिसवारन ने अपनी नई पुस्तक, 'Wages for Housework: A Feminist Experiment with Unconditional Cash Transfers for Women' में इन भुगतानों का पुरजोर समर्थन किया है। उनका तर्क है कि यह कदम महिलाओं द्वारा किए जाने वाले उस अदृश्य श्रम को स्वीकार करता है, जिसे अक्सर अर्थव्यवस्था में शून्य माना जाता है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
ऐतिहासिक रूप से, घरेलू काम और देखभाल (Care Work) को 'गैर-आर्थिक' माना जाता रहा है। नारीवादी आंदोलनों ने लंबे समय से इस बात की मांग की है कि घर के भीतर किए जाने वाले कार्यों का आर्थिक मूल्य आंका जाना चाहिए। भारत में हाल के वर्षों में विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा दी जाने वाली नकद सहायता इस दिशा में एक बड़ा प्रयोग है।
Frequently Asked Questions
1. बिना शर्त नकद हस्तांतरण (UCT) क्या है?
यह एक ऐसी सरकारी योजना है जिसमें बिना किसी विशेष शर्त या कार्य के सीधे महिलाओं के बैंक खातों में पैसा भेजा जाता है।
2. इन योजनाओं का मुख्य विवाद क्या है?
मुख्य विवाद यह है कि क्या ये भुगतान शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे दीर्घकालिक सामाजिक निवेशों के बजट को कम कर रहे हैं।