भारत सरकार ने पश्मिना और मोहैयर उत्पादन को बढ़ाने के लिए एक व्यापक बकरी प्रजनन योजना शुरू की है। यह योजना स्वदेशी बकरियों की चयनात्मक प्रजनन और विदेशी सोवियत नस्लों के क्रॉस‑ब्रेडिंग पर केंद्रित है, जो उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में उगाई जाएगी।

Key Takeaways

  • ICAR द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर बकरी प्रजनन परियोजना शुरू
  • लेह और मुख्तेश्वर में दो अनुसंधान केंद्र स्थापित
  • चैन थांगी बकरियों की संख्या 40,000 से बढ़ाने की योजना

नई दिल्ली, 3 अगस्त: भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने पश्मिना और मोहैयर के उत्पादन को तेज़ करने हेतु एक व्यापक रणनीति घोषित की है। यह पहल गर्म लक्ज़री कपड़ों के निर्यात बाजार को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से तैयार की गई है, जहाँ भारत की उच्च गुणवत्ता वाली पश्मिना का विशेष स्थान है।

रणनीति के तहत स्वदेशी बकरी नस्लों की चयनात्मक प्रजनन के साथ‑साथ सोवियत आयातित नस्लों के क्रॉस‑ब्रेडिंग पर भी बल दिया जाएगा। उच्च ऊँचाई वाले हिमालयी क्षेत्रों, विशेषकर उत्तर प्रदेश के शिमला‑जिले के आसपास, इन बकरियों के पालन के लिये उपयुक्त स्थल माने गए हैं।

वर्तमान में लेह (लद्दाख) और मुख्तेश्वर (उत्तर प्रदेश) में दो प्रमुख अनुसंधान केंद्र स्थापित हैं। इन केंद्रों में वैज्ञानिक बकरियों की प्रजनन, पोषण, और ऊन की गुणवत्ता सुधारने के लिये आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर रहे हैं।

डॉ. आर. एम. आचार्य, इस परियोजना के मुख्य समन्वयक, के अनुसार, लद्दाख में केवल 40,000 चैन थांगी बकरियाँ पाई जाती हैं, जबकि हिमाचल प्रदेश में उनकी संख्या अत्यंत सीमित है। इन बकरियों का ऊन "दूसरे देशों के उत्पादों से बराबर या थोड़ा बेहतर" माना जाता है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि पश्मिना और मोहैयर का निर्यात भारत की वस्त्र उद्योग की विदेशी मुद्रा आय में 15% तक योगदान दे सकता है, जिससे ग्रामीण आर्थिक विकास को नई दिशा मिलेगी।

"सही प्रजनन तकनीक और ऊँचाई वाले क्षेत्रों में पोषण समर्थन से पश्मिना उत्पादन दो गुना हो सकता है," डॉ. आचार्य ने कहा।
Did You Know?: पश्मिना ऊन का वजन केवल 6 ग्राम प्रति बकरी होता है, लेकिन इसकी नाजुकता और गर्मी क्षमता इसे विश्व की सबसे मूल्यवान ऊन बनाती है।

Frequently Asked Questions

  • प्रश्न: इस नई योजना से किस प्रकार के किसानों को लाभ होगा?
    उत्तर: पहाड़ी क्षेत्रों के छोटे और बड़े दोनों पैमाने के किसान, जो बकरी पालन में संलग्न हैं, उन्हें तकनीकी सहायता और बेहतर बाजार मूल्य मिलेंगे।
  • प्रश्न: क्या विदेशी बकरी नस्लों के आयात में कोई प्रतिबंध है?
    उत्तर: वर्तमान में, आयात प्रक्रिया को कड़े क्वारंटाइन और स्वास्थ्य मानकों के तहत नियंत्रित किया जा रहा है।