उडुपी में बागवानी विभाग द्वारा तीन दिवसीय 'सस्य संथे' का आयोजन किया गया है, जहाँ विभिन्न प्रकार के पौधों, फूलों और फलों के पेड़ों की प्रदर्शनी लगाई गई है। यह आयोजन किसानों और शहरी बागवानों को जैविक खेती और प्राकृतिक बागवानी को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित करता है।
मुख्य बातें
- उडुपी के शिवल्ली मॉडल बागवानी विस्तार केंद्र में तीन दिवसीय 'सस्य संथे-2026' का आयोजन।
- फल, फूल, औषधीय और सजावटी पौधों की एक ही छत के नीचे विशाल प्रदर्शनी।
- जैविक खेती और प्राकृतिक खाद के उपयोग पर विशेष जोर।
- शहरी निवासियों के लिए घरेलू बागवानी के लिए आवश्यक उपकरण और खाद की उपलब्धता।
उडुपी शहरी विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष दिनाकर हेरुर ने शुक्रवार को उडुपी के डोडनागुडे स्थित शिवल्ली मॉडल बागवानी विस्तार केंद्र के पुष्प नीलामी केंद्र में तीन दिवसीय 'सस्य संथे-2026' (पौध मेला) का औपचारिक उद्घाटन किया। यह मेला रविवार तक चलेगा और बागवानी के प्रति उत्साही लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा।
उद्घाटन समारोह के दौरान, श्री हेरुर ने कहा कि मानसून के दौरान आयोजित इस मेले का उद्देश्य किसानों और आम जनता को बागवानी के पौधे, फूल और फलों के पेड़ खरीदने और उगाने के लिए प्रोत्साहित करना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वर्तमान वर्षा ऋतु पौधों के विकास के लिए अत्यंत लाभकारी है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह आयोजन?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि इस प्रकार के मेले न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देते हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। श्री हेरुर ने कहा, "पौधे जीवन का आधार हैं। वे न केवल मनुष्यों को भोजन प्रदान करते हैं, बल्कि पशुओं और पक्षियों के लिए भी जीवन रक्षक हैं।" उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के बजाय जैविक खेती और प्राकृतिक खेती पर अधिक ध्यान देने का आह्वान किया ताकि उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद प्राप्त किए जा सकें।
प्राकृतिक खेती और जैविक खाद का उपयोग न केवल मिट्टी की उर्वरता बढ़ाता है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी सुरक्षित खाद्य श्रृंखला सुनिश्चित करता है।
बागवानी विभाग की संयुक्त निदेशक क्षमा पाटिल ने बताया कि नर्सरी में उपलब्ध पौधे शहरी क्षेत्रों में घरों के आसपास सुंदर बगीचे विकसित करने में मदद करेंगे। मेले में केवल पौधे ही नहीं, बल्कि खाद, बागवानी उपकरण, चिया बीज, रागी व्यंजन, मिलेट प्यूरी और मदिकेरी बटर फ्रूट जैसे विभिन्न खाद्य उत्पाद भी उपलब्ध हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
कर्नाटक के तटीय जिलों में बागवानी का एक समृद्ध इतिहास रहा है। 'सस्य संथे' जैसे आयोजन पारंपरिक कृषि ज्ञान को आधुनिक बागवानी तकनीकों के साथ जोड़ने का प्रयास करते हैं, जिससे छोटे किसानों को अपनी आय बढ़ाने में मदद मिलती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. सस्य संथे कितने दिनों तक चलेगा?
यह तीन दिवसीय मेला है जो रविवार तक खुला रहेगा।
2. क्या यहाँ शहरी बागवानों के लिए भी विकल्प उपलब्ध हैं?
हाँ, यहाँ सजावटी पौधों के साथ-साथ बागवानी उपकरण और खाद भी उपलब्ध हैं।