किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) की समस्याओं को दूर करने के लिए गठित केंद्रीय समिति ने तिरुचि में एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस दौरान FPO प्रतिनिधियों ने वित्तीय सहायता और बुनियादी ढांचे की मांग उठाई।
मुख्य बिंदु
- केंद्रीय कृषि मंत्री द्वारा गठित 7 सदस्यीय समिति ने तिरुचि में बैठक की।
- देश भर में 45,000 FPOs में से केवल 4,009 ही पांच साल बाद लाभदायक हैं।
- FPO प्रतिनिधियों ने लंबित इक्विटी अनुदान और CEO के वेतन के लिए वित्तीय सहायता की मांग की।
- तमिलनाडु में लगभग 10 लाख किसान FPOs के सदस्य हैं।
तिरुचि: किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को प्रभावित करने वाले मुद्दों का अध्ययन करने के लिए गठित केंद्रीय समिति ने मंगलवार को तिरुचि स्थित ICAR-राष्ट्रीय केला अनुसंधान केंद्र (NRCB) में FPO प्रतिनिधियों के साथ एक गहन विचार-विमर्श सत्र आयोजित किया।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा गठित यह सात सदस्यीय समिति, FPOs के सामने आने वाली बाधाओं की जांच करने और उनके समाधान के लिए सिफारिशें देने के उद्देश्य से बनाई गई है। इस सत्र में तमिलनाडु भर के लगभग 135 FPO प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिसका विषय 'तमिलनाडु में किसान उत्पादक संगठन: प्रदर्शन, स्थिरता, चुनौतियां और भविष्य की संभावनाएं' था।
FPOs की स्थिरता पर संकट
NRCB के निदेशक डॉ. आर. सेल्वरराजन ने एक चौंकाने वाला तथ्य साझा किया। उन्होंने राष्ट्रीय कृषि विज्ञान अकादमी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि देश भर में लगभग 45,000 FPOs कार्यरत हैं, लेकिन इनमें से केवल 4,009 ही पांच वर्षों के बाद लाभदायक बने रह सके हैं। उन्होंने खराब स्थिरता के मुख्य कारणों में अपर्याप्त प्रशिक्षण, पूंजी की कमी और कमजोर मार्केटिंग नेटवर्क को जिम्मेदार ठहराया।
क्यों यह महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यदि FPOs को सही वित्तीय और संरचनात्मक समर्थन नहीं मिला, तो कृषि क्षेत्र में बिचौलियों का वर्चस्व बना रहेगा। समिति के सदस्य जी. रंगनाथन ने बताया कि तमिलनाडु में 27 प्रमुख कृषि वस्तुओं के व्यापार में बिचौलिये लगभग ₹44,000 करोड़ का हिस्सा ले जाते हैं। यदि FPOs प्रभावी ढंग से काम करते हैं, तो यह बड़ा हिस्सा सीधे किसानों तक पहुंच सकता है।
FPOs को केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित न रखकर उन्हें एक स्वतंत्र शासन तंत्र और मजबूत मार्केटिंग नेटवर्क प्रदान करना अनिवार्य है।
FPO प्रतिनिधियों ने सरकार से लंबित इक्विटी अनुदान जारी करने, CEO के वेतन के लिए सहायता देने और ऑडिट संबंधी जटिलताओं (जैसे ROC ऑडिट) में ढील देने का आग्रह किया। उन्होंने मांग की कि NAFED को सीधे FPOs से कृषि उत्पाद खरीदने चाहिए ताकि किसानों को लाभकारी मूल्य मिल सके।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. FPOs के सामने मुख्य चुनौतियां क्या हैं?
मुख्य चुनौतियों में पूंजी की कमी, अपर्याप्त प्रशिक्षण, कमजोर मार्केटिंग नेटवर्क और कठिन ऑडिट नियम शामिल हैं।
2. सरकार FPOs को कैसे मजबूत कर रही है?
सरकार NABARD और NAPKISAN के माध्यम से वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है और विशेष समितियों के माध्यम से उनकी समस्याओं का समाधान खोजने का प्रयास कर रही है।