तिरुचि जिले में मानसून की कमी और सूखे की स्थिति को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों को पीपीएफएम (PPFM) बैक्टीरिया के छिड़काव का सुझाव दिया है। यह तकनीक फसलों को गर्मी और पानी की कमी से बचाने में मदद करती है।
मुख्य बातें
- पीपीएफएम (PPFM) एक लाभकारी बैक्टीरिया है जो पौधों की वृद्धि को बढ़ावा देता है।
- यह फसलों को कम से कम 10 दिनों तक सूखे और गर्मी के तनाव से बचा सकता है।
- इसे प्रति एकड़ एक लीटर की दर से 15 दिनों के अंतराल पर दो बार छिड़का जा सकता है।
तमिलनाडु के तिरुचि जिले में मानसून की अनिश्चितता और मेट्टूर बांध में पानी के कम स्तर के कारण कृषि विभाग ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अधिकारियों ने किसानों को पिंक पिग्मेंटेड फैकल्टेटिव मिथाइलोट्रॉफ़्स (PPFM) का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया है, ताकि फसलों को सूखे जैसी स्थिति से बचाया जा सके।
पीपीएफएम एक प्रकार का लाभकारी बैक्टीरिया है जो 'फाइलोस्फीयर' (पत्तियों की सतह) पर काम करता है। यह पौधों के लिए एक विकास प्रवर्धक (growth promoter) के रूप में कार्य करता है और पानी की कमी या अत्यधिक गर्मी के कारण होने वाले तनाव को कम करने में मदद करता है। कृषि अधिकारियों के अनुसार, यह तकनीक फसलों को लगभग 10 दिनों तक सूखे के प्रभाव से सुरक्षित रख सकती है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि एल नीनो (El Nino) के प्रभाव के कारण मानसून कमजोर रहने की संभावना है। ऐसे में, पारंपरिक सिंचाई विधियों पर निर्भरता कम करने के लिए जैविक समाधान जैसे पीपीएफएम अत्यंत प्रभावी साबित हो सकते हैं। यह न केवल फसल की सुरक्षा करता है बल्कि मिट्टी के स्वास्थ्य को भी बनाए रखता है।
पीपीएफएम का छिड़काव फसलों को पानी के तनाव के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करता है, जिससे कम पानी में भी बेहतर उत्पादन संभव है।
तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय (TNAU) द्वारा समर्थित इस तकनीक का उपयोग लगभग एक दशक पहले धान की फसलों पर किया गया था। वर्तमान में, मुसिरी ब्लॉक में ज्वार, मूंगफली, तिल और गन्ने जैसी फसलों पर इसके सफल प्रयोग देखे गए हैं। कृषि विभाग अब केंद्रीय सब्सिडी योजनाओं के तहत प्रदर्शन भूखंडों के लिए पीपीएफएम वितरित करने की योजना बना रहा है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
पीपीएफएम का उपयोग पहली बार तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में गंभीर सूखे के दौरान धान की खेती में किया गया था। हालांकि उस समय इसका व्यापक स्तर पर उपयोग नहीं हुआ, लेकिन वर्तमान जलवायु परिवर्तन और अनियमित वर्षा के दौर में विशेषज्ञों ने इसे फिर से अपनाने पर जोर दिया है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: पीपीएफएम का उपयोग किन फसलों के लिए किया जा सकता है?
उत्तर: इसका उपयोग ज्वार, मूंगफली, तिल, गन्ना और अदरक जैसी लगभग सभी प्रमुख फसलों के लिए किया जा सकता है।
प्रश्न 2: छिड़काव करने का सही तरीका क्या है?
उत्तर: इसे प्रति एकड़ एक लीटर की दर से, 15 दिनों के अंतराल पर दो बार छिड़का जाना चाहिए।