आंध्र प्रदेश सरकार ने भोगपुरम अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए भूमि देने वाले किसानों को आश्वासन दिया है कि उनका मुआवजा अदालत के माध्यम से जल्द ही वितरित किया जाएगा। मुआवजे की राशि को लेकर किसानों और सरकार के बीच भारी खींचतान चल रही है।
मुख्य बातें
- सरकार ने किसानों को अदालत के माध्यम से मुआवजा दिलाने का वादा किया है।
- किसान ₹48 लाख के मुकाबले ₹1 करोड़ प्रति एकड़ की मांग कर रहे हैं।
- प्रधानमंत्री मोदी की आगामी यात्रा से पहले प्रशासन पर काम पूरा करने का दबाव है।
विजयनगरम जिले में भोगपुरम अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के निर्माण के लिए अपनी भूमि समर्पित करने वाले किसानों के परिवारों को एक महत्वपूर्ण आश्वासन दिया गया है। एमएसएमई और एनआरआई मामलों के मंत्री कोंडापल्ली श्रीनिवास और कलेक्टर एस. रामसुंदर रेड्डी ने स्पष्ट किया कि सरकार किसानों के साथ न्याय करने के लिए प्रतिबद्ध है।
विवाद का मुख्य कारण मुआवजे की राशि है। सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्ग-16 से हवाई अड्डे तक जाने वाली एप्रोच रोड के लिए भूमि देने वाले किसानों को प्रति एकड़ ₹48 लाख देने का प्रस्ताव दिया था। हालांकि, किसानों का तर्क है कि बाजार दरों को देखते हुए उन्हें कम से कम ₹1 करोड़ प्रति एकड़ मिलना चाहिए। इस गतिरोध के कारण, सरकार ने राशि को विशाखापत्तनम ट्रिब्यूनल में जमा कर दिया है, जिसे किसानों को कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से प्राप्त करना होगा।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल मुआवजे का नहीं, बल्कि भूमि अधिग्रहण के दौरान किए गए वादों और बड़े बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के सामाजिक प्रभाव का भी है। यदि किसानों के असंतोष को समय रहते दूर नहीं किया गया, तो यह परियोजना में देरी का कारण बन सकता है।
मुआवजे का विवाद बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में भूमि अधिग्रहण की सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।
हाल ही में, राविवालासा, गुडेपुवालासा और बैरेड्डीपलेम के किसानों ने विरोध प्रदर्शन किया था। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि हवाई अड्डे के उद्घाटन से पहले उन्हें भुगतान नहीं किया गया। इसके अलावा, मराडपलेम के ग्रामीणों ने भूमि अधिग्रहण (2016-2026) के दौरान किए गए युवाओं को रोजगार देने के वादे को पूरा करने की मांग की है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भोगपुरम हवाई अड्डा परियोजना आंध्र प्रदेश के विकास के लिए एक मील का पत्थर है, लेकिन पिछले एक दशक में भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास (R&R) से संबंधित जटिलताएं बनी रही हैं। सरकार अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 1 अगस्त, 2026 को होने वाली संभावित यात्रा से पहले सभी लंबित कार्यों को पूरा करने की कोशिश कर रही है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: किसान किस राशि की मांग कर रहे हैं?
उत्तर: किसान बाजार दरों के आधार पर ₹1 करोड़ प्रति एकड़ की मांग कर रहे हैं, जबकि सरकार ₹48 लाख का प्रस्ताव दे रही है।
प्रश्न 2: मुआवजा कब तक मिलेगा?
उत्तर: सरकार के अनुसार, अदालत की प्रक्रिया के माध्यम से कुछ महीनों के भीतर मुआवजा वितरित कर दिया जाएगा।